देश के सबसे बड़े टर्मिनल का इंतजार अभी और

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Friday, February 14, 2014-11:36 AM

नई दिल्ली (राजन शर्मा): राजधानी में रेलवे यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं में विस्तार के लिए द्वारका के पास बिजवासन में बनने वाले मेगा रेलवे टर्मिनल का निर्माण तो सालों से जारी है पर बजट की कमी से यह पूरा नहीं हो पाया है। यूपीए-2 की सरकार के अंतिम रेल बजट में भी रेल मंत्री ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई, जिसले इस साल भी यह परियोजना ठंडे बस्ते में रह सकती है। साथ ही रेलवे टर्मिनल न बनने से नई व पुरानी दिल्ली के स्टेशनों से यात्रियों की भीड़ कम करने की योजना एक बार फिर धाराशाई हुई। बिजवासन में बने रेलवे टर्मिनल के वर्तमान हालात बदत्तर है। यहां से गुजरने वाले यात्रियों को स्टेशन पर टॉयलेट व पीने के पानी तक की सुविधा नहीं उपलब्ध नहीं है। लोगों का आरोप है की इस टर्मिनल पर लाईट भी अक्सर गायब रहती है और सुरक्षा की कमी के चलते अब खुद स्टेशन मास्टर भी चिंतित नजर आते है। जबकि वर्तमान से हर रोज करीब 100 गाडिय़ा यहां से गुजरती है।

इसलिए खास है मेगा टर्मिनल

अगर इसे बना दिया जाए, तो दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश में अपनी तरह का यह एकमात्र रेलवे स्टेशन होगा, जो भूमिगत मैट्रो टर्मिनल, अंतर्राज्यीय बस अड्डा, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और इंटीग्रेटेड फ्रेट कॉम्पलैक्स से जुड़ा हुआ होगा। यहां से गुजरात, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए सवारी गाडिय़ों के साथ मालगाडिय़ों चलने की योजना है। यहां अपनी तरह के एक प्लेटफार्म व दूसरा आई लैंड प्लेटफार्म के साथ 2 कम ऊंचाई वाले प्लेटफार्म बनेंगे। साथ ही व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए विकसित करने का प्रस्ताव भी है। 

कॉमनवैल्थ से पहले होना था तैयार 

इसके बनने की योजना लंबे समय से है, जो बजट न मिलने से पूरी नहीं हो पाई है। जबकि सरकार ने कॉमनवेल्थ खेलों से पहले इसका निर्माण पूरा कर शुरू करने की तेजी दिखाई थी, लेकिन खेलों के खत्म होने के बाद यह योजना पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। वर्ष 2014 के रेलवे बजट में परियोजना के लिए प्रस्तावित बजट न मिलने से न केवल यह परियोजना अधर में है। साथ ही एक बार फिर इसे के निर्माण की उम्मीद टूटती नज़र आ रही है।


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