जनलोकपाल बिल को मेरी मंजूरी नहीं: उपराज्यपाल नजीब जंग

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Friday, February 14, 2014-3:59 PM

नई दिल्ली: जनलोकपाल बिल पर दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने विधानसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखी है। उपराज्यपाल ने कहा कि बिल को मेरी मंजूरी नहीं इसलिए इसे विधानसभा में नहीं पेश किया जा सकता। शुक्रवार को एलजी ने विधानसभा स्‍पीकर से यह साफ कर दिया कि बिना मंजूरी के बिल को विधानसभा में पेश नहीं कर सकते। उधर, आम आदमी पार्टी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एलजी नजीब जंग ने बिल पेश करने को लेकर कोई टिप्‍पणी नहीं की है।

वहीं, उप राज्यपाल नजीब जंग ने आज दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष को सलाह दी कि वह आम आदमी पार्टी सरकार को जनलोकपाल विधेयक विधानसभा में पेश करने की अनुमति न दें। ‘आप’ सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर ‘पुनर्विचार’ नहीं करेगी।  उप राज्यपाल नजीब जंग ने कहा कि सदन में पेश करने के लिए विधेयक को आवश्यक मंजूरी नहीं मिल पाई है। 

विधानसभा अध्यक्ष एम एस धीर को लिखे पत्र में उप राज्यपाल ने कहा कि ‘आप’ सरकार ने विधेयक सदन में पेश करने के लिए मंजूरी हासिल करने की खातिर आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। पत्र मे उन्होंने धीर से कहा है कि सदन का संरक्षक होने के नाते उन्हें इस मुद्दे से निपटते समय इन पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए। 

शीर्ष सूत्रों ने बताया कि जंग के पत्र का सार यह है कि विधानसभा अध्यक्ष को विधेयक सदन में पेश करने की अनुमति नहीं देना चाहिए।   विधानसभा अध्यक्ष को उप राज्यपाल द्वारा पत्र भेजे जाने के तत्काल बाद ‘आप’ सरकार के सूत्रों ने बताया कि वे विधेयक सदन में पेश करने के फैसले पर ‘‘पुनर्विचार’’ नहीं करेंगे।  मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीती रात फिर दोहराया कि अगर कांग्रेस और भाजपा प्रस्तावित विधेयक को पारित नहीं होने देते हैं तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।  उन्होंने कहा ‘‘हम सत्र की अवधि आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। हम यहां सरकार बचाने के लिए नहीं हैं। हम कल सदन में विधेयक पेश करेंगे। अगर वह अनुमति देते हैं तो ठीक है अन्यथा मैं इस्तीफा दे दूंगा।’’

 धीर को लिखे पत्र में जंग ने संकेत दिया है कि उनकी मंजूरी के बिना विधेयक सदन में पेश करना असंवैधानिक है।  केजरीवाल कहते रहे हैं कि विधेयक को सदन में पेश करने के लिए केंद्र या उप राज्यपाल से पूर्व अनुमति लेने की जरूरी नहीं है जबकि भाजपा और कांग्रेस की राय है कि ‘‘ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स (टीबीआर), 2002’’ के तहत यह अनुमति जरूरी है। 

कानून मंत्रालय का कहना है कि टीबीआर के तहत यह जरूरी है कि उप राज्यपाल ऐसे प्रत्येक विधायी प्रस्ताव को केंद्र के पास भेजें जिसमें अतिरिक्त वित्त सहायता की जरूरत पड़ सकती है।  कल से शुरू हुआ चार दिन का विधानसभा सत्र जनलोकपाल और स्वराज विधेयकों को पारित करने के लिए आयोजित किया गया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने बताया कि पार्टी ‘‘असंवैधानिक’’ जनलोकपाल विधेयक को सदन में पेश करने की अनुमति नहीं देगी क्योंकि ‘आप’ सरकार ने आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। 

शर्मा ने कहा ‘‘हम आप सरकार को विधेयक पेश करने की अनुमति कभी नहीं देंगे। उप राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को विधेयक पेश करने की अनुमति न देने की सलाह पहले ही दे दी है। विधानसभा अध्यक्ष को उप राज्यपाल की सलाह का पालन करना चाहिए।’’ भाजपा के वरिष्ठ नेता हर्षवद्र्धन ने कहा कि पार्टी सरकार के किसी भी असंवैधानिक कदम का समर्थन नहीं करेगी।


 


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