दिल्ली के CM के पद से अरविंद केजरीवाल का इस्तीफा

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Saturday, February 15, 2014-12:13 AM

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनलोकपाल विधेयक विधानसभा में पेश न करा पाने के बाद आज रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया तथा विधानसभा भंग कर राजधानी में तुरंत चुनाव कराने की मांग की है। केजरीवाल ने आज दिन भर के नाटकीय घटनाक्रम के बाद पार्टी मुख्यालय में आकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। केजरीवाल ने उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात कर उन्हें अपनी कैबिनेट का इस्तीफा सौंपा।

उन्होंने कार्यकर्त्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनके मंत्रिमंडल ने विधानसभा भंग करके दिल्ली में तुरंत चुनाव कराने की उपराज्यपाल नजीब जंग से सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की फिक्सिंग की वजह से जनलोकपाल विधेयक पेश नहीं किया जा सका। ये दोनों पार्टियां लंबे समय से पर्दे के पीछे एकजुट होकर देश को लूटती रही हैं लेकिन आज दोनों खुलकर सामने आ गई और भ्रष्टाचार के खिलाफ लाए गए जनलोकपाल विधेयक को विफल कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के इशारे पर ऐसा किया है।

केजरीवाल ने इससे पहले विधानसभा में विधेयक पेश नहीं होने पर अपने पद से इस्तीफा देने का संकेत दे दिया था। उन्होंने कहा कि हम भ्रष्टाचार से लड़ाई के लिए राजनीति में उतरे हैं और इसके लिए एक सरकार तो क्या हजार बार सरकार कुर्बान कर देंगे। कांग्रेस के आठ विधायकों के समर्थन से केजरीवाल ने अपने 28 विधायकों के साथ 28 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। जनता दल (यू) के एक और एक निर्दलीय विधायक ने भी उन्हें समर्थन दिया था।

सरकार बनाने के बाद से ही वह यह कह रहे थे कि कांग्रेस और भाजपा के रवैये को देखते हुए उनकी सरकार ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। कुछ ही दिन में केजरीवाल को अपनी पार्टी के भीतर भी विरोध का सामना करना पड़ा। पार्टी के विधायक विनोद कुमार बिन्नी के बागी तेवरों की वजह से उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया। निर्दलीय रामबीर शौकीन ने भी अपना समर्थन वापस ले लिया था।

केजरीवाल के इस्तीफे से दिल्ली विधानसभा के भविष्य को लेकर अटकलें लगनी शुरु हो गई हैं। संविधान विशेषग्यों की राय है कि मुख्यमंत्री को विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने का अधिकार है लेकिन उसको मानना या नहीं मानना उपराज्यपाल पर निर्भर करता है। दिल्ली विधानसभा की जो गणित है उसमें किसी के लिए सरकार बनाना काफी मुश्किल नजर आता है। इसलिए ऐसे में आगामी आम चुनाव के साथ राज्य विधानसभा के चुनाव कराने के भी कयास लगने शुरु हो गए हैं। विधानसभा में भाजपा कुल 32 विधायकों के साथ सबसे बड़े दल के रुप में है।

केजरीवाल के गुरु अन्ना हजारे ने कहा कि जनलोकपाल और मौहल्ला सभाएं अत्यंत महत्वपूर्ण मसले हैं और इन मुद्दों पर केजरीवाल का इस्तीफा देना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस और भाजपा का कहना था कि वे जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में है, लेकिन वे ऐसे विधेयक का ही समर्थन करेंगे जो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लाया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह जनलोकपाल विधेयक केन्द्र की अनुमति के बिना विधानसभा में लाया गया है इसलिए यह असंवैधानिक है और वे इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं।


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