265 रूपए की रिश्वत लेने पर लगा 50 हजार जुर्माना

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Friday, February 14, 2014-8:15 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने 29 साल पहले एक ठेकेदार से 265 रूपए की रिश्वत लेने वाले सरकारी अधिकारी पर आज 50 हजार रूपए का जुर्माना लगाया। न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर्मचारी वी के वर्मा को दोषी ठहराने वाला निर्णय बरकरार रखा लेकिन उसे सुनाई गई डेढ़ साल की सजा को जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दिया। 

न्यायालय ने वर्मा की उम्र और उनके गिरते स्वास्थ्य पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करके यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि वर्मा तीन महीने के भीतर 50 हजार रूपए के जुर्माने की राशि जमा करेंगे और ऐसा नहीं करने पर उन्हें छह महीने की कैद की सजा भुगतनी होगी। न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘यह अपराध 1984 का है। अब लगभग तीन दशक हो चुके हैं। अभियुक्त पहले ही तीन महीने तक जेल में रह चुका है और करीब तीन दशक से मानसिक कैद झेल रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर अपीलकर्ता को जेल में रखना शासन के लिये आर्थिक रूप से नुकसानदायक और एक जिम्मेदारी डालने वाला होगा’’

सत्र अदालत ने 10 अप्रैल, 2003 को वर्मा को विभिन्न धाराओं के तहत डेढ़ साल की कैद और पांच-पांच हजार रूपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि सजा की अवधि के बारे में फैसला करते समय उच्चतम अदालत ने आरोपी के अपराध के बारे में अदालतों में अंतिम निर्णय लेने में अत्यधिक विलंब को मुख्य रूप से ध्यान में रखा है।


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