ट्विटर ट्रेंड्स : भगोड़ा करार दे दिए गए केजरीवाल

  • ट्विटर ट्रेंड्स : भगोड़ा करार दे दिए गए केजरीवाल
You Are HereNational
Saturday, February 15, 2014-1:37 AM
नई दिल्ली  (हर्ष कुमार सिंह) : अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया और प्रतिक्रियाओं की जैसे सोशल मीडिया पर झड़ी लग गई। दिलचस्प बात ये है कि जहां सारा दिन इस प्रकरण को लेकर ट्विटर और फेसबुक पर मिक्स प्रतिक्रियाएं ही चल रही थी वहीं उनका इस्तीफा हो जाने के बाद निगेटिव रिएक्शन ही ज्यादा आने लगी। हजारों की संख्या में ट्वीट आने लगे और टॉप टेन ट्रेंड्स में हैशटैग भगोड़ा केजरी नंबर वन पर ट्रेंड करने लगा। ये चौंकाने वाला  था। 
 
आमतौर पर राय ये बन रही थी कि केजरीवाल ने जनता के हितों को लेकर कुर्बानी दे दी है, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं थी जो ये कह रहे थे कि उन्होंने एक मौका खो दिया और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। टॉप टेन ट्रेंडस में पहले नंबर पर हैशटैग भगोड़ा केजरी था तो तीसरे नंबर पर अर्नाकिस्ट कांग्रेस बीजेपी था। छठे नंबर पर मुकेश अंबानी ही ट्रेंड करने लगे। जबकि ऐसा कुछ हुआ भी नहींं था। इसकी वजह ये थी केजरीवाल ने अपने भाषण में ये कह दिया कि कांग्रेस और भाजपा को अंबानी से पैसा मिल रहा है। इसके अलावा दसवें नंबर पर आप नेता योगेंद्र यादव ट्रेंड कर रहे थे। 
 
केजरीवाल को भगोड़ा बताने के लिए सबसे ज्यादा लोग बेताब नजर आ रहे थे। किसी ने उनका एक फोटो पोस्ट कर दिया। इसमें भाग मिल्खा भाग के पोस्टर पर केजरीवाल का चेहरा लगा दिया गया था और लिख दिया गया था कि भाग केजरी भाग। इसके अलावा एक ट्वीट में ये भी बताने की कोशिश की गई थी कि किस तरह से केजरीवाल ने तमाम अहम मुद्दों पर भगोड़ा होने का परिचय दिया। इसमें उनके रैवन्यू डिपार्टमेंट से नौकरी छोड़ देने को भी भगोड़े की संज्ञा देने का प्रयास कर दिया गया था। अंत में उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को भी भगोड़ा हो जाना ही करार दे दिया गया। 
 

ट्विटर पर केजरीवाल को लेकर नकारात्मक टिप्पणियों की भरमार की एक वजह ये भी है कि जिन लोगों ने आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया था वे चाहते थे कि ये सरकार आगे भी चलती रहे। इसके सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले भाजपा समर्थकों को भी मौका मिल गया कि वे केजरीवाल को नीचा दिखा सकें। निगेटिव ट्वीट करने वालों में कई आईडी ऐसी भी थी जो भाजपा नेताओं के फोटो अपने डिस्प्ले पिक्चर में लगाए हुए थे। इसके अलावा वे नरेंद्र मोदी व बीजेपी को भी इनमें टैग कर रहे थे।

इससे ये भी संकेत मिले कि इनके पीछे भाजपा समर्थकों का हाथ था। अलबत्ता कुछ ऐसे लोग भी थे जो वास्तव में केजरीवाल सरकार के इस अंत से व्यथित नजर आए। इनमें से एक का कहना था कि केजरीवाल ने अपने कार्यकाल में 70 से भी अधिक प्रेस कांफ्रेंस की और काम तो उन्होंने किया ही नहीं।  


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You