केरल के मंदिर में पहुंचेंगी 40 लाख महिलाएं

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Sunday, February 16, 2014-11:50 AM

तिरुवनंतपुरम: यहां मनाए जाने वाले प्रसिद्ध अट्टुकल पोंगल त्योहार के तहत रविवार को भोग पकाने के लिए रविवार को चालीस लाख से अधिक महिलाओं के जुटने की उम्मीद है। यह अनुमान समारोह आयोजकों ने जाहिर किया है। पिछले वर्ष इस मौके पर चालीस लाख से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया था और आयोजकों को इस वर्ष संख्या बढऩे की उम्मीद है। शहर के बीचों-बीच स्थित मंदिर अट्टुकल भगवती को समर्पित है जिन्हें तमिल महागाथा सिलाप्पतिकारम के केंद्रीय पात्र कन्नकी का एक अवतार माना जाता है।

 

पोंगल आयोजन 10 दिनों तक चलने वाले अट्टुकल पोंगल के अंतिम दिन से पहले मनाया जाता है। इसे सबरीमला के बराबर का माना जाता है लेकिन यह केवल महिलाओं के लिए होता है। मंदिर की ओर जाने वाली सड़क के एक किनारे से महिलाएं कतार बनाए रहती हैं और चावल, गुड़ व नारियल से भोग पकाती है। राज्य सरकार ने आयोजकों को तैयारी करने के लिए शनिवार को आधी छुट्टी घोषित की है। महागाथा के मुताबिक, कन्नकी ने मदुरै के राजा द्वारा उनके पति को गलत तरीके से मौत की सजा दिए जाने के बाद मदुरै का ध्वंस कर दिया था।

 

इसके बाद कन्नकी केरल की ओर चली आई जहां वह कुछ समय के लिए अट्टुकल में रहीं और कहा जाता है कि उन्हें प्रसन्न करने के लिए महिलाओं ने पोंगल पकाया था। इस उत्सव में हिस्सा लेने के लिए महिलाएं बिलकुल नए परिधान में होती हैं और भोग पकाने के लिए कच्ची सामग्री के साथ-साथ बर्तन लेकर आती हैं। मंदिर का मुख्य पुजारी रविवार की सुबह सबसे पहले मंदिर के गर्भ गृह से लाई गई अग्नि से लाकर एक पात्र में अग्रि प्रज्ज्वलित करेगा।

 

इसके बाद सड़क के किनारे जहां तक महिलाएं अपना-अपना चूल्हा लगा कर बैठी रहती हैं वहां तक आग एक-एक कर बढ़ाती जाती हैं। इस मौके पर यात्रा के लिए राज्य पथ परिवहन और रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। राज्य सरकार के एक कर्मचारी श्रीलता मेनन ने कहा, ‘यह एक ऐसा मौका है जिसका कई हिंदू स्त्रियां बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा करती हैं। पूरे वर्ष तक महिलाएं यह अनुभव बांटती रहती हैं कि किस तरह इस आयोजन में भाग लेने के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई।’


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