‘वैष्णो देवी इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल एक्सीलैंस’ स्थापित करने का प्रस्ताव

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Sunday, February 16, 2014-12:09 PM

अमृतसर: देश के सबसे संवेदनशील राज्य जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के मानसिक तनावों से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड आगे आया है। इसके लिए बोर्ड ‘वैष्णो देवी इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल एक्सीलैंस’ में एक विशेष यूनिट की स्थापना करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यही नहीं, बोर्ड के चेयरमैन एन.एन. वोहरा ने वैष्णो देवी इंस्टीच्यूट में उच्चतम स्तर की मैडीकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किए थे।

इस इंस्टीच्यूट में विशेषकर आतंकवाद पीड़ित परिवार की महिलाएं जो मानसिक तनाव में चल रही हैं, का इलाज किया जाएगा वहीं इंस्टीच्यूट में प्रस्तावित काऊंसलिंग यूनिट में मरीजों की काऊंसलिंग कर उनके तनाव को दूर किया जाएगा। इस आशय का आश्वासन बोर्ड द्वारा बोर्ड की कमेटी के पूर्व सदस्य रजनीश खोसला को दिया गया है।   

सूत्रों के अनुसार, बोर्ड 285 करोड़ रुपए खर्च कर कटड़ा के समीप एक मैडीकल इंस्टीच्यूट बनवा रहा है जिसमें श्रद्धालुओं, क्षेत्रीय निवासियों के अलावा जम्मू-कश्मीर के दूसरे भागों में रहने वाले लोगों के भी इलाज के लिए अत्यधिक आधुनिक सुविधाएं सामान्य दामों पर मिल सकेंगी। विदित हो कि गत दशकों में राज्य में आतंकवाद का काला साया मंडराता रहा जिसका सबसे बुरा प्रभाव जम्मू-कश्मीर की महिलाओं पर पड़ा। अपना घर-बार छोडऩे को मजबूर होने वाले कश्मीरी पंडित परिवारों को भी विशेष तौर पर मैडीकल सुविधाएं बोर्ड द्वारा उपलब्ध करवाई जाएंगी।

इस बारे में श्राइन बोर्ड को एक विस्तृत सुझाव का मसौदा रजनीश खोसला द्वारा जम्मू-कश्मीर के माननीय राज्यपाल के अलावा श्राइन बोर्ड के कुछ अन्य सदस्यों को भी दिया गया है। एक तरफ जहां गत मीटिंग में भी बोर्ड के चेयरमैन एन.एन. वोहरा द्वारा वैष्णो देवी इंस्टीच्यूट में उच्चतम स्तर की मैडीकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं वहीं अब जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों तथा आस-पास के निवासियों के लिए भी इस केंद्र में सुविधाएं उपलब्ध होंगी, अन्यथा उन्हें इसके लिए राज्य से दूर जाने की परेशानी उठानी पड़ती है।

बताते चलें कि कई दशकों के उग्रवाद का खमियाजा आज भी कई लोग भुगत रहे हैं जिनकी मानसिकता पर लगातार तनावग्रस्त हालात में रहने से बुरा असर पड़ा है अन्यथा शताब्दियों से सौहार्द तथा भाईचारे का अमृतपान करने वाले इस राज्य के भोले-भाले लोगों को उग्रवाद के बाद ऐसी परेशानियों झेलनी पड़ीं जो पहले कभी नहीं थीं। जानकारी के अनुसार इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित दूर-दराज गांवों में रहने वाले 35 से 55 वर्ष की आयु की महिलाएं हैं। अब चाहे हालात बदल रहे हैं परन्तु कई वर्षों तक जारी रहे इस अवसाद से पनपे मानसिक दबाव ने कई रोगों को ‘साइकोटिक’ श्रेणी के मानसिक रोगों से ग्रस्त कर दिया है। बोर्ड द्वारा इस इंस्टीच्यूट में एक ‘काऊंसलिंग यूनिट’ प्रस्तावित है जहां बिना किसी दबाव के लैक्चर तथा चिकित्सा द्वारा मानसिक तनावों का इलाज करवाया जा सके।


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