मिर्च स्प्रे कांड के बाद संसद सुरक्षा का मुद्दा फिर से विवादों में

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Sunday, February 16, 2014-12:19 PM

नई दिल्ली: आतंकवादी हमले के बाद संसद परिसर की सुरक्षा को चाक चौबंद बनाने के लिए यहां बॉडी स्कैनर लगाने की योजना बनाई गई थी लेकिन एक दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद आज इस योजना का कोई अता पता नहीं है और संसद में मिर्च स्प्रे कांड के बाद संसद सुरक्षा का मुद्दा फिर से विवादों में आ गया है ।
 
संसद भवन परिसर में सुरक्षा संबंधी समिति के अध्यक्ष और लोकसभा उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने संपर्क किए जाने पर ‘भाषा’ को बताया, ‘‘पिछली कई बैठकों में ऐसे किसी विषय पर चर्चा हुई या नहीं इस पर तो बैठकों की मिनट्स देखकर ही कुछ कहा जा सकता है। हालांकि संसद की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया कराने का विषय तो आया था।’’
 
उन्होंने संसद भवन में सांसदों की जांच नहीं किए जाने संबंधी सवाल पर कहा कि पहले सांसदों की भी जांच होती थी लेकिन बीच में इसे बंद कर दिया गया । जांच बंद किए जाने के कारण संबंधी सवाल का जवाब करिया मुंडा टाल गए । उन्होंने केवल इतना कहा कि अब इस मुद्दे पर सोमवार को समिति की बैठक बुलायी गयी है। लोकसभा सचिवालय सूत्रों ने जानकारी दी कि वर्ष 2011 के मानसून सत्र में अगस्त में सिंगापुर की एक कंपनी स्मिथ्स डिटेक्शन वीकोन सिस्ट्मस ने संसद भवन ग्रंथालय इमारत के प्रवेश द्वार पर अपने गैजेट्स का प्रदर्शन किया था।
 
संसद भवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और संयुक्त सचिव :संसद सुरक्षा: अजय आनंद ने बॉडी स्कैनर की योजना के संबंध में पूछे जाने पर एक न्यूज एजेंसी से केवल इतना कहा, ‘‘संसद की सुरक्षा के मुद्दे पर मैं कोई बात नहीं कर सकता। मैं सुरक्षा के मसले पर कोई भी जानकारी देने या बात करने के लिए अधिकृत नहीं हूं।’’
 
लोकसभा सचिवालय सूत्रों ने बताया कि सिंगापुर स्थित कंपनी ने बॉडी स्कैनर के रूप में जिन मशीनों का प्रदर्शन किया था उसमें मिली मीटर वेव टेक्नोलोजी का इस्तेमाल कर बॉडी इमेजिंग तैयार की जाती है और यह मशीन मानव शरीर में हड्डियों तक का खाका तैयार करने में सक्षम है। वर्ष 2009 से लेकर वर्ष 2013 तक संसद की सुरक्षा संबंधी समिति की लगभग हर बैठक में मौजूद रहे वरिष्ठ भाजपा नेता और लोकसभा सदस्य कीर्ति झा आजाद ने बताया कि बॉडी स्कैनर लगाने का कोई मुद्दा समिति की बैठकों में नहीं आया।
 
उन्होंने कहा, ‘‘इन बैठकों में संसद में आने वाले आम आदमी से जुड़े सुरक्षा विषयों पर चर्चा हुई । सांसदों की ओर से संसद को खतरा होने की बात कोई कैसे सोच सकता है । किसी ने नहीं सोचा था कि मिर्च स्प्रे जैसी कोई घटना होगी।’’ सूत्रों ने बताया कि संसद और सांसदों की सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए संसद भवन में जांच के लिए बॉडी स्कैनर लगाए जाने की परियोजना का खुद सांसदों द्वारा विरोध किया जा रहा था, जिसके चलते यह महत्वाकांक्षी परियोजना अधर में लटक गई।
 
लोकसभा सचिवालय सूत्रों ने बताया कि करिया मुंडा की अध्यक्षता वाली समिति ने मार्च 2010 में हुई बैठक में सिंगापुर की कंपनी से पूर्व सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड को जल्द ही इन मशीनों का डैमो का निर्देश देने के लिए कहा था। इससे पहले समिति ने सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को इन उपकरणों की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए विभिन्न देशों में भी भेजने का सुभाव दिया था लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया।

गौरतलब है कि संसद भवन में सांसदों और वरिष्ठ नौकरशाहों को जांच से छूट प्रदान की गई है। हालांकि अमेरिकी संसद में केवल राष्ट्रपति को छोड़कर बाकी सभी को बाडी स्कैनर जांच से गुजरना पड़ता है।


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