गुजरात दंगों की 1984 के दंगों से कोई तुलना नहीं: जयराम

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Sunday, February 16, 2014-3:59 PM

नई दिल्ली: कांग्रेस के थिंक टैंक माने जाने वाले केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को देश एवं पार्टी पर एक धब्बा करार दिया है लेकिन 2002 के गुजरात दंगों से उसकी तुलना करने से इन्कार किया है। रमेश ने गुजरात दंगों को देश में 60 वर्ष से चली आ रही नफरत की विचारधारा का परिणति करार दिया है1 केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने एक टेलीविजन चैनल को दिये इन्टरव्यू में यह बात कही। उन्होंने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगे देश और कांग्रेस पर एक धब्बा है और इसके पीड़ितों के लिए और किये जाने तथा दोषियों को न्याय के शिकंजे में लाये जाने की जरूरत है।

उन्होंने 1984 के दंगों की गुजरात में 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगे से तुलना करने से इन्कार करते हुए कहा कि गुजरात में दंगे नफरत एवं दानवी विचारधारा का नतीजाथे.जो 60 वर्षों से फैलाये जा रहे हैं। कुछ समय पूर्व एक साक्षात्कार में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा 1984 के  सिख विरोधी दंगे और 2002 के गुजरात दंगे पर रखे गये विचारों का जिक्र किये जाने पर उन्होंने कहा कि गांधी का कहना बिल्कुल सही है कि दोनों दंगों में परिस्थितियां एकदम विपरीत थीं।

सिख विरोधी दंगों के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जगह जगह जाकर शांति की अपील की थी। सेना बुलाई थी लेकिन वर्ष 2002 में गुजरात में ऐसा कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि 1964 के दंगे नफरत की विचारधारा से नहीं फैले थे1 यही कारण है कि कांग्रेस पंजाब में पहले हारी और फिर से चुनी भी गई1 उन्हीं सिखों ने कांग्रेस को वोट दिया। जब यह पूछा गया कि क्या राहुल गांधी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह 1984 के  सिख विरोधी दंगों के लिए खेद नहीं जताना चाहिए तो उन्होंने कहा कि खेद प्रकट करने के  लिए बहुत कुछ कहा एवं किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खेद व्यक्त कर चुके हैं। गांधी स्वर्ण मंदिर जा कर मत्था टेक चुके हैं1 वर्ष 1984 के दंगों के पीडितों को न्याय दिलाने के लिए काफी कुछ किया जाना है।


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