राहुल अपने अंदर झांके, क्यों लंबित हैं विधेयक: भाजपा

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Sunday, February 16, 2014-5:33 PM

नई दिल्ली:  भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक विधेयकों को संसद में अटकाने का विपक्ष पर आरोप लगाए जाने पर पलटवार करते हुए आज कहा कि संसद के वर्तमान सत्र में कांग्रेस के ही सदस्य बार.बार व्यवधान डाल रहे है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने अपने एक लेख में कहा कि पिछले सप्ताह संसद के वर्तमन सत्र के बीच में यह प्रश्न उठा कि कई विधेयकों को पारित नहीं होने देने के लिए कौन जिम्मेदार है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कल बयान दिया है कि भाजपा संसद में इन विधेयकों को पारित नहीं होने दे रही है।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि कांग्रेस ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंध(संप्रग) के दस वर्ष के शासन के आखिरी समय में कुछ विधेयक लायी है जब वह संसद के दोनों सदनों में बहुमत खो चुकी है। जेटली ने कहा कि ज्यादातर ऐसे विधेयक जिन पर कोई विवाद नहीं है, जैसे रेहडी पटरी वालों को सुरक्षा देने संबंधी बिल, बुन्देलखंड में केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधी बिल आदि विधेयक थोडी चर्चा के बाद पारित कराये जा सकते हैं। विकलांगों के कई संगठन उनके मुद्दों से जुडे विधेयक को पारित कराने पर जोर दे रहे हैं लेकिन गांधी इनके और भ्रष्टाचार निरोधी विधेयकों को पास नहीं होने का भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को इन विधेयकों पर कोई आपत्ति नहीं है तथा वह इनमें से ज्यादातर विधेयकों को पारित कराना चाहती है लेकिन संसद के दोनों सदनों में व्यवधान के लिए कांग्रेस स्वयं जिम्मेदार हैं। दोनों में से किसी भी सदन में भाजपा का एक भी सदस्य आसन के समीप नहीं गया।

जेटली ने कहा कि हर दिन दोनों सदनों की कार्यवाही तेलंगाना के मुद्दे पर हंगामे के कारण स्थगित की जा रही है। बडी संख्या में कांग्रेस के सांसद संसद को रोजाना बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री राहुल गांधी को सदन में खुद आकर देखना चाहिए कि संसद को उन्हींकी पार्टी के सांसद बाधित कर रहे हैं। उन्होंने  गांधी को आडे हाथों लेते हुये कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कामनवेल्थ घोटाला, कोयला घोटाला जैसे भ्रष्टाचार के बडे-बडे मुद्दों पर चुप्पी साधे रहे गांधी को बहुत देर बाद समझ में आया है कि भ्रष्टाचार भारतीय राजनीति का बडा मुद्दा है। जेटली ने कहा कि गांधी को यह बात देरी से समझने के लिए अपनी पीठ थपथपाने और वाहवाही बटोरने की बजाय अपने अंदर झांकना चाहिए कि ये विधेयक आखिर क्यों अटके पडे हैं।


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