केजरीवाल चुनाव लड़े, तो गिर सकता है पार्टी का ग्राफ

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Tuesday, February 18, 2014-12:55 AM
नई दिल्ली(अशोक शर्मा): आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच शुरू हुई गहमागहमी के बाद अब यह मुद्दा भी चर्चा का विषय बन गया है कि क्या अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा को छोड़कर लोकसभा का चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं।
 
हालांकि अभी तक केजरीवाल ने इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन राजधानी की जनता और आप कार्यकर्ताओं की सोच ऐसी है कि यदि उन्होंने दिल्ली से बाहर कहीं से लोकसभा चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया, तो इससे दिल्ली में आप का ग्राफ गिर सकता है। 
बेशक पार्टी के वरिष्ठ नेता योगेन्द्र यादव का कहना है कि इसका फैसला केजरीवाल स्वयं लेंगे कि वह लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे या नहीं।
 
पार्टी उनसे चुनाव लडऩे का अनुरोध जरूर करेगी और इस बाबत अंतिम फैसला भी उन्हें ही लेना है। वैसे सूत्रों की माने तो आप के नेता केजरीवाल को चुनाव मैदान में उतारने के लिए लालायित हैं। अन्ना हजारे के जनलोकपाल आंदोलन के दौरान भी दो चेहरे सर्वाधित चर्चा में थे, उनमें से एक अरविंद केजरीवाल और दूसरा किरण बेदी। 
 
लेकिन बाद में केजरीवाल पार्टी बना लेने से अन्ना से अलग हो गए। केजरीवाल की वजह से ही जनता ने आप को वोट दिया। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इलाके के लोगों ने जिन लोगों का चेहरा तक नहीं देखा, वे चुनाव में जीत गए। आम आदमी पार्टी बनाने के बाद केजरीवाल ने जिस तरह से समाज के हर तबके के लोगों के बीच में जाकर प्रचार कर सफलता हासिल की, वह पार्टी का कोई और नेता नहीं कर सका।
 
जहां तक आप के अन्य नेता मनीष सिसोदिया का सवाल है, वह कुछेक इलाकों में तो चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे, लेकिन लोगों के सामने केजरीवाल की ही छवि हावी रही। इसीलिए आप से जुड़े लोगों का कहना है कि बेशक केजरीवाल के लोकसभा चुनाव लडऩे के बारे में चर्चाएं कुछ भी हों, लेकिन वह जानते हैं कि दिल्ली से बाहर चुनाव लडऩा एक जोखिस भरा कदम हो सकता है। 
 
विधानसभा चुनाव और उसके बाद उनकी विचारधारा और सिद्धांतों से जुड़े लोगों की सोच में केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अब बदलाव आया है। उनका कहना है कि जब केजरीवाल शुरू से ही इस बात को जोरशोर से कह रहे थे कि समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करना ही उनका लक्ष्य है, तो उन्हें कांग्रेस से सहयोग लेकर सरकार बनानी ही नहीं चाहिए थी।
 
और यदि बना ली, तो इस्तीफा देने की बजाए उन्होंने मुकाबला क्यों नहीं किया। इसीलिए आप का साथ दे रहे लोग अब यह कह रहे हैं कि इस्तीफे से ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में उनकी सरकार आंधी की तरह आई और तूफान की तरह उड़ गई। 

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