विश्व पुस्तक मेले में लेखकों ने रखे विचार

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Tuesday, February 18, 2014-9:59 PM
नई दिल्ली : विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन द्वारा लेखक मंच कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम कई लेखकों ने अपने विचार रखे।  इस दौरान पुस्तक मेले में सुनीता बुद्धिराजा के अनुभवों और संस्मरण का संग्रह सात सुरों के बीच का लोकार्पण हाल संख्या 18 में किया गया। पुस्तक का प्रकाशन वाणी प्रकाशन ने किया है।
 
 सुनीता ने इसमें संगीत की दुनिया के सात दिग्गजों के साथ बिताए गए खट्टे-मीठे पलों को साझा किया है। इस मौके पर उन्होंने बताया कि वह शायद किताब न लिखतीं, लेकिन जब मित्रों और रिश्तेदारों ने उन्हें अनुभवों को किताब की शक्ल में गढऩे की सलाह दी तो वह राजी हो गईं। 
 
 मंच के संचालक कवि यतीन्द्र मिश्र ने कहा कि जिस तरह से अज्ञेय ने सप्तक की रचना की है, ठीक उसी तरह सात सुरों के भी कई अंक निकाले जाएं।
लेखिका अल्पना मिश्र ने कहा कि जीवन जितना जटिल होगा, मानवीय संबंधों पर उसका उतना ही असर पड़ेगा। राजकमल प्रकाशन ने उनके संपादन में सहोदर विषय पर कहानियों का संग्रह प्रकाशित किया है। 
 
 प्रेम विषय पर लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने संपादित पुस्तकों की कहानियों पर प्रकाश डाला। कविता ने अपनी रचना उलटबांसी पर विस्तृत चर्चा की। आलोचक राकेश बिहारी ने संबंधों के टूटने पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कहानी के बीच से संबंध हटा लिए जाएं तो कहानी बचेगी ही नहीं। वर्तमान में संबंध टूट ही नहीं रहे हैं बल्कि पुनर्गठन से भी गुजर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन अरुण देव ने किया।
 
 
 
 

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