तेलंगाना: जगन को छोड़ भाजपा ने क्यों दिया कांग्रेस का साथ?

  • तेलंगाना: जगन को छोड़ भाजपा ने क्यों दिया कांग्रेस का साथ?
You Are HereNational
Wednesday, February 19, 2014-12:50 AM

नई दिल्ली : तेलंगाना तथा आंध्र क्षेत्र के एकीकरण के 58 वर्ष बाद लोकसभा में विधेयक पास कर आंध्र प्रदेश राज्य को दो भागों में बांट दिया गया है। दिलचस्प बात यह हुई कि कांग्रेस तथा भाजपा ने आंध्र प्रदेश को बांटने में हाथ मिलाया। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 42 सीटें हैं और यदि तेलंगाना अलग राज्य बनता है तो उसे 17 सीटें मिलेंगी तथा सीमांध्र में 25 सीटें जाएंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस लोकसभा की 17 तथा विधानसभा की 119 सीटों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है। कांग्रेस अपने आपको सीमांध्र क्षेत्र में शून्य मान रही है। तेलंगाना की 17 सीटों पर कांग्रेस टी.आर.एस. और भाजपा चन्द्रबाबू नायडू की पार्टी टी.डी.पी. के साथ जा सकती है।

इसके पीछे की रणनीति यह है कि भाजपा टी.डी.पी. के साथ गठबंधन कर कम से कम 10 सीटें जीतने की सोच रही है, जिसमें  भाजपा के गठजोड़ वाली टी.डी.पी. 8 तथा भाजपा 2 सीटों की उम्मीद लगाए हुए है। मतलब कांग्रेस तथा भाजपा के लिए तेलंगाना घाटे का सौदा न रह कर एक फायदे का सौदा साबित हो सकता है तभी तो दोनों पार्टियों ने आंध्र के बंटवारे में अपना हाथ मिलाया। दूसरी तरफ इस फैसले से सीमांध्र में वाई.एस.आर. जगनमोहन रैड्डी को नुक्सान हुआ है क्योंकि क्षेत्र की राजनीति में काफी मजबूत होने के बावजूद तेलंगाना मुद्दे पर उनके हाथ कोई क्रैडिट नहीं लगा है। हालांकि जगन भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मिल चुके हैं मगर फिर भी भाजपा ऐसे व्यक्ति पर भरोसा नहीं जता रही जोकि पूर्व में कांग्रेस का ही हिस्सा थे।

भाजपा का मानना है कि जगन की पार्टी चूंकि कांग्रेस से ही टूट कर बनी है, इसलिए यदि वह जगन से हाथ मिलाती है तो कहीं आखिर में जगन जैसा मजबूत सहयोगी उसे आंखें न दिखाने लगे और देर-सवेर अपने फायदे के लिए अपनी पार्टी का कांग्रेस में ही विलय न कर लें।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You