सैंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम हो गया हवा हवाई

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Wednesday, February 19, 2014-1:38 AM
नई दिल्ली(रोहित राय): दिल्ली में सालों से बर्बाद हो रहे पानी को बचाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड की सैंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम को लगाने की योजना हवा हवाई हो गई है। राजधानी में बिछी जल बोर्ड की 14 हजार किलोमीटर लंबी पानी की कुछ लाइनों में से लगातार रिसाव हो रहा है और अभी तक लीकेज को ढूंढऩे के लिए बोर्ड के पास कोई ठोस व आधुनिक तकनीक नहीं है। 
 
पिछले साल बोर्ड ने दिल्ली के सभी जल शोधन संयंत्रों और पानी की लाइनों को सैंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम से जोडऩे की योजना बनाई थी जिस पर अभी तक काम भी शुरू नहीं हो पाया है। लाइनों हो रहे रिसावों से लगातार पानी बर्बाद हो रहा है और पानी की बर्बादी को रोकने के लिए बोर्ड गंभीर नहीं है।  
 
पानी की पाइप लाइनों में होने वाली लीकेज को तुरंत ढूंढ़ने के लिए लगाया जाने वाला सैंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम अभी तक नहीं लग पाया है। आधुनिक तकनीक से लैस इस सिस्टम को राजधानी के सभी जल शोधन संयंत्र और पानी की पाइप लाइनों से जोड़े जाने की योजना थी। इस सिस्टम के पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद दिल्ली में अगर किसी भी पाइप लाइन में लीकेज होगी तो उसकी जानकारी तुरंत एक टी.वी. स्क्रीन पर आ जाएगी।
 
लीकेज का पता चलते ही बोर्ड के कर्मचारी मौके पर पहुंचकर लीकेज को ठीक कर सकेंगे जिससे न सिर्फ लोगों को पानी की परेशानी से दो-चार नहीं होना पड़ेगा बल्कि पानी बर्बाद होने से भी बच जाएगा। सैंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम से जल शोधन संयंत्रों को जोड़ने से संयंत्रों से होने वाला पानी का उत्पादन भी पता चल जाएगा। 
 
इसके अलावा सिस्टम की सहायता से पानी की गुणवत्ता का भी पता लगाया जा सकेगा। फिलहाल जल बोर्ड के अधिकारी संयंत्रों से होने वाले पानी के उत्पादन की जानकारी टैलीफोन पर लेते हैं। साथ ही बोर्ड के पास वर्तमान में ऐसा कोई भी सिस्टम नहीं है जिससे संयंत्रों की कार्यप्रणाली के बारे में पता लगाया जा सके। सैंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करने के लिए स्काडा भी लगाया जाना है। राजधानी में अभी भी संैकड़ों किलोमीटर की पाइप लाइनें वर्षों पुरानी है जिससे आए दिन लाइनों में तमाम तरह की दिक्कतें होती रहती हंै। पानी की लीकेज होने से दिल्ली में रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। 
 
राजधानी की मौजूदा जनसंख्या के मुताबिक गर्मियों में पानी की रोजाना मांग 1100 एम.जी.डी. है। जल बोर्ड इसमें से अपने तमाम स्त्रोतों से 847 एम.जी.डी. पानी ही जुटा पाता है। सैंटल मोनिटरिंग सिस्टम के लग जाने से न सिर्फ पानी अभी के मुकाबले बहुत कम बर्बाद होगा, बल्कि पानी की बचत भी हो सकेगी। 

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