सबसे उम्रदराज व्यक्ति होने का दावा

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Wednesday, February 19, 2014-9:46 AM

कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रहने वाले बुजुर्ग ने विश्व के सबसे उम्रदराज व्यक्ति होने का दावा किया है। बुजुर्ग के मुताबिक उनकी उम्र 117 वर्ष है। कोरबा जिले के तिल्हापाई गांव में रहने वाले प्रेमसाय पटेल ने दावा किया है कि उनका जन्म 11 मई 1896 को हुआ था। इस तरह उनकी उम्र 117 वर्ष आठ माह है। हालांकि विश्व रिकार्ड के मुताबिक सबसे उम्रदराज महिला 115 वर्षीय मिसाओ ओकावा है जो जापान में रहती है। प्रेमसाय की उम्र के सत्यापन की बात करें तो उनके पास हाल ही में बनाया गया आधार कार्ड है, जिसमें जन्मतिथि 11 मई 1896 दर्ज है।

 

कोरबा जिले की सांख्यिकी अधिकारी मधु साहू ने बताया कि कोरबा जिले के जन्म मृत्यु के आंकड़े वर्ष 2005 से है। इससे पहले यह आंकड़े बिलासपुर मुख्यालय में उपलब्ध है। हालांकि वहां भी वर्ष 1896 के आंकड़े उपलब्ध नहीं है। वहीं जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पी. आर. कुंभकार ने बताया कि किसी भी मनुष्य की आयु 117 वर्ष या उससे अधिक हो सकती है। उम्र का सत्यापन बोन टेस्ट से किया जा सकता है। प्रेमसाय पटेल और उनके परिवार का दावा है कि प्रेमसाय का जन्म 11 मई 1896 को हुआ था। इस लिहाज से उनकी उम्र 117 साल आठ महीने पूरी हो गई है। इस उम्र में भी वे चुस्त हैं और आज भी वे अपना काम स्वयं करते हैं। 

 

परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनके तीन पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र इतवारी पटेल की उम्र 80 साल से अधिक है। मंझले महेश पटेल व सबसे छोटे गणेशराम हैं। चार पीढिय़ों के इस परिवार में 50 से अधिक सदस्य हैं। खास बात यह है कि इस उम्र में भी प्रेमसाय आत्मनिर्भर हैं। उन्होंने बताया कि प्रेमसाय की पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरी शादी बुच्ची बाई से की है। पुत्र इतवारी ने बताया कि वे अपने पिता को काम न कर आराम करने की गुजारिश कई बार कर चुके हैं, लेकिन वे नहीं मानते हैं। वहीं प्रेमसाय का कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह का खास आहार अपने लिए तय नहीं किया है।

 

आमतौर पर जो कुछ भी मिलता है खा लेते हैं। चौथी कक्षा तक पढ़े प्रेमसाय का जन्म सक्ती के मोहंदीकला गांव में हुआ था। उस जमाने में उनकी गिनती पढ़े लिखे लोगों में होती थी और यही वजह है कि उन्हें दस गांव के बच्चों के लिए खोले गए स्कूल में शिक्षक की नौकरी भी मिल गई थी। लगभग 40 वर्ष की उम्र में ही प्रेमसाय मोहंदीकला गांव को छोड़कर तिल्हापताई गांव आ गए थे। प्रेमसाय के मंझले पुत्र महेश ने बताया कि उनके पिता को किसी तरह की कोई बीमारी नहीं है तथा वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। आज तक ऐसी नौबत नहीं आई है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा हो।


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