राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी रिहा होंगे: तमिलनाडु सरकार

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Wednesday, February 19, 2014-5:47 PM

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के तीन हत्यारों की फांसी की सजा आजीवन कारावास में तब्दील करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के एक दिन बाद ही आज तमिलनाडु सरकार ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुये इन तीनों समेत देश को दहला देने वाले इस हत्यांकाड के सभी सात दोषियों की रिहाई के आदेश दे दिये। अब केंद्र से इस पर तीन दिनों में रिस्पॉन्स मांगा गया है।

तमिलनाडु में राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक लाभ उठाने के लिए राजीव गांधी के हत्यारों की तरफदारी को लेकर होड़ मच गई है। डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने मंगलवार को फैसले के तुरंत बाद ही कहा था कि अगर संथन, मुरुगन और पेरारिवलन की रिहाई होती है, तो उन्हें बहुत खुशी होगी।

दरअसल, तीनों पुरुष दोषियों की फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही उम्रकैद में तब्दील किया था, और यह फैसला राज्य सरकार पर छोड़ दिया था कि वह दोषियों को रिहा करना चाहती है या नहीं।

मुख्यमंत्री जे. जयललिता की अध्यक्षता में  आज सुबह सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की आपात बैठक में यह फैसला किया गया। इस फैसले के मुताबिक 1991 में हुये इस हत्याकांड के तीनों दोषियों संतन, मुरूगन और पेरारीवलन के साथ नलिनी और तीन अन्य को भी रिहा कर दिया जायेगा।

नलिनी श्रीहरन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने वाले तीन में से एक हत्यारे मुरुगन की पत्नी है। नलिनी के मृत्युदंड को पहले ही कांग्रेस प्रमुख तथा भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद उम्रकैद में तब्दील किया जा चुका था।

आपको बता दें कि उम्रकैद की सजा का मतलब होता है कि दोषी को सारी ज़िंदगी जेल में रहना होगा, लेकिन राज्य सरकार चाहे तो 14 साल की सजा काट लेने के बाद दोषी को रिहा कर सकती है। नलिनी समेत बाकी दोषी पहले से ही जेल में हैं. 14 साल से ज्यादा की सजा काट चुके हैं।

संविधान विशेषज्ञ केटीएस तुलसी के मुताबिक इस पर अब राज्यपाल को फैसला लेना होगा। उन्होंने कहा राज्यपाल ऐसे मामलों पर केंद्र सरकार से सलाह-मशविरा करके फैसला लेते हैं।

यह है मामला
साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या के तीनों दोषियों की फांसी की पुष्टि कर दी थी, लेकिन संतन, मुरुगन और पेरारिवलन ने राष्ट्रपति के पास दया की गुहार लगाई। उनकी दया याचिका साल 2011 में खारिज हो गई और उनको फांसी पर चढ़ाने की तैयारी होने लगी। लेकिन उस दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी फांसी की सजा पर रोक लगा दी। तब मामला फिर से सुप्रीम कोर्ट के पास आ गया। यहां राजीव गांधी हत्याकांड के तीनों दोषियों ने दया याचिकाओं के निबटारे में विलंब को आधार बनाते हुए मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने का अनुरोध किया। उनकी दलील थी कि दया याचिकाओं के निबटाने में हुई देरी के कारण उन्हें काफी मानसिक संताप झेलना पड़ा है। तीनों दोषियों ने यह तर्क भी दिया कि उनकी दया याचिकाओं के बाद दायर दया याचिका पर तो पहले फैसला हो गया लेकिन उनकी याचिकाओं को सरकार ने लटकाए रखा।


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