केजरीवाल को हाईकोर्ट से झटका, 50 फीसदी बिजली बिल छूट पर रोक

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Wednesday, February 19, 2014-4:47 PM

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज राजधानी की सरकार को निर्देश दिया कि वह अक्तूबर 1012 से दिसंबर 2013 तक के बिजली बिलों की अदायगी नहीं करने वाले उपभोक्ताओं को दी गई पचास प्रतिशत की छूट को लागू नहीं करे।  न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीडी अहमद और सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने आज अपने मौखिक आदेश में कहा ,‘इस विषय में कोई अगला कदम नहीं उठाएं ।’’ इसके साथ ही पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई 21 फरवरी को करना तय किया। 

इस बीच , अदालत ने दिल्ली सरकार के सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वह इस बारे में निर्देश लें और एक हलफनाम दाखिल करें जिसमें आप सरकार के इस प्रस्ताव की वास्तविक स्थिति के बारे में बताया जाए। अदालत ने यह आदेश इस वजह से दिया है क्योंकि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी कि क्या दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल ने वाकई वह छूट देने के संबंध में फैसला किया था या नहीं। याचिकाकर्ता विवेक शर्मा ने याचिका में यह दावा किया है।

  अदालत विवेक शर्मा की उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा अक्तूबर, 2012 से दिसंबर, 2013 के बीच बिजली के बिलों का भुगतान नहीं करने वालों को पचास प्रतिशत की छूट देने के आदेश को चुनौती दी गई है।   अदालत ने इस संबंध में सरकारी  फाइल का अध्ययन करने के बाद कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा लिखी एक टिप्पणी में कहा गया है कि छूट देने के प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाना चाहिए।  

अदालत ने कहा कि हालांकि ऐसा लगता है कि इस बारे में कोई फैसला नहीं किया गया था फिर भी मामले में ‘‘कुछ स्पष्ट नहीं है।’’   पीठ ने दिल्ली सरकार के सरकारी वकील से कहा ,‘‘इस बारे में उचित निर्देश हासिल करें और अगर जरूरी हो तो एक हलफनामा दाखिल करें जिससे वास्तविक स्थिति का पता चल सके।’’

सुनवाई के दौरान शर्मा ने कहा कि मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार इस संबंध में एक प्रस्ताव लागू किया जा चुका है और आप नेता मनीष सिसोदिया ऐसा खुलकर कह चुके हैं।   इस पर पीठ ने शर्मा से कहा ,‘‘ऐसा नहीं है। :फाइल के आधार पर कह सकते हैं कि:इस बारे में कैबिनेट ने कोई भी फैसला नहीं किया था । इस आशय के किसी फैसला का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है।’’
 


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