मध्यप्रदेश को बासमती चावल की खेती बाला क्षेत्र स्वीकार करें: चौहान

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Thursday, February 20, 2014-11:08 AM

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश को बासमती चावल की खेती वाला क्षेत्र स्वीकार करने के भौगोलिक सांकेतक पंजीयक चेन्नई के फैसले के विरूद्ध कृषि और खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण .एपीड्रा. द्वारा बौद्धिक संपदा अपीलीय मंडल चेन्नई में अपील दायर करने पर गहरा क्षोभ और निराशा व्यक्त की है। चौहान ने कहा कि भौगोलिक सांकेतक पंजीयक चेन्नई के पास मध्यप्रदेश ने राज्य के किसान संगठनों के साथ पिछली एक शताब्दी से ज्यादा समय से पारम्परिक रूप से बासमती चावल का उत्पादक प्रदेश प्रमाणित करने के लिए अनगिनत अविवादित और प्रामाणिक प्रमाण दिए हैं।

 

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की गुणवत्ता उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में उत्पादित बासमती से अधिक नहीं है तो कम भी नहीं है1 उन्होने इसी आशय का पत्र केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार, केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंंत्री आनन्द शर्मा को भी लिखा है।चौहान ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एपीडा जिसके पास कृषि उत्पादन के निर्यात को प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी है उत्तरी भारत के कतिपय निहित स्वार्थों के दबाव में आ गया है।

 

उन्होंने संस्था द्वारा अपने ही आदेश के विरूद्ध और डब्ल्यूटीओ एवं इंटरनेशनल कोर्टस् की आड में जीआई के 31 दिसंबर 2013 के आदेश के विरूद्ध याचिका दायर करने को मध्यप्रदेश के किसानों के जायज व वैधानिक अधिकारों पर चोट बताया है। चौहान ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि एपीडा को पाकिस्तान में पैदा हुए बासमती पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मध्यप्रदेश को बासमती उत्पादक क्षेत्र में शामिल करने में आपत्ति है।


 


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