क्या नरेंद्र मोदी को खुश करने के लिए सुषमा ने नहीं दिया अडवानी का साथ?

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Thursday, February 20, 2014-11:41 AM

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीष्म पितामह कहे जाने वाले लाल कृष्ण अडवानी अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। अडवानी की खास सहयोगी और उनके कैम्प की प्रमुख सिपहसालार सुषमा स्वराज ने भी अब उनसे किनारा कर लिया है। सूत्रों के अनुसार तेलंगाना मुद्दे पर गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, जयराम रमेश की भाजपा नेता लाल कृष्ण अडवानी, सुषमा स्वराज और अरुण जेतली से एक बैठक हुई।

बैठक में अडवानी आखिर तक तेलंगाना बिल को समर्थन के खिलाफ थे, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब उन्हीं के कैम्प की प्रमुख सहयोगी सुषमा स्वराज ने उनके विरोध को खारिज कर दिया। बैठक में यह भी कहा गया कि अडवानी को छोड़कर पार्टी के 4 नीति निर्धारकों राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेतली और नरेंद्र मोदी ने तय किया है कि तेलंगाना को यू.पी.ए. के प्रभाव और सीमांध्र को भाजपा के प्रभाव में पनपने दिया जाए।

वैसे भी भाजपा का आंध्र में खास जनाधार नहीं है और तेलंगाना के विभाजन से उसे कांग्रेस के बराबर फायदा दिखाई दे रहा है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि तेलंगाना मुद्दे पर सीमांध्र के जो प्रतिनिधि अडवानी से मिलने उनके घर गए थे वे उन पर यह गलत प्रभाव डाल रहे थे कि तेलंगाना का विरोध पार्टी के हित में है, जबकि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख पहले से ही स्पष्ट था। दिलचस्प बात यह है कि अडवानी के तेलंगाना बिल का विरोध करने के बावजूद सुषमा स्वराज ने अपने सार्वजनिक बयान में कहा कि तेलंगाना मुद्दे पर अडवानी और राजनाथ उनके साथ हैं।

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