सोशल मीडिया लिख रहा ‘बेवफाई’ की नई इबारत

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Thursday, February 20, 2014-1:19 PM

नई दिल्ली: डिजिटल वल्र्ड में धड़ल्ले से विवाह से इतर संबंधों की इबारत लिखी जा रही है। क्लासिफाइड लिसिं्टग साइट क्रेग्सलिस्ट की सर्च के मुताबिक, बेंगलुरू में पिछले 30 दिनों में ऐसे 300 पुरुष और महिलाओं के मामले सामने आए, जो शादीशुदा हैं, लेकिन ‘इश्क’ की तलाश में है। हालांकि, मुम्बई और दिल्ली में इससे थोड़े कम मामले पाए गए। मुम्बई में 110 और दिल्ली में इस तरह के 150 मामले सामने आए हैं। डेटिंग फॉर चीटर्स, हश अफेयर और फाइंड न्यू पैशन जैसी वैबसाइट्स पर भी प्राइवेट अफेयर्स चाहने वाले लोगों से जुड़ी इसी तरह के एड देखे जा सकते हैं। इस तरह की लिसिंटग में लगातार बढ़ौतरी हो रही है।

सोशल मीडिया पुराने प्रेमी-प्रेमिकाओं और नए लोगों से जुडऩे का देता है मौका  मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया ‘बेवफाई’ का अड्डा बनता जा रहा है। हालांकि, ‘बेवफाई’ का वजूद सदियों से है, लेकिन जानकारों के मुताबिक, सोशल मीडिया लोगों को प्राइवेट तरीके से पुराने प्रेमी-प्रेमिकाओं और नए लोगों से जुडऩे का मौका देता है। बेंगलुरू के एक मेंटल हैल्थ क्लीनिक के साइकायट्रिस्ट का कहना है कि उनके आंकड़ों के मुताबिक, ‘बेवफाई’ के तकरीबन 2 तिहाई मामलों में सोशल मीडिया का अहम रोल है। बाकी काऊंसलर्स 10 में से 3-4 मामलों के लिए सोशल मीडिया को जिम्मेदार मानते हैं।

सोशल मीडिया पिछली जिंदगी को कभी भुलाने नहीं देतादिल्ली की साइकॉलजिस्ट निशा खन्ना के मुताबिक, मैरिज काऊंसङ्क्षलग क्लाइंट्स पर सोशल मीडिया का असर 50 फीसदी है। मुम्बई की संस्था माइंडटैंपल के पास हर महीने 3-4 मामले ऐसे आते हैं, जिसमें ‘बेवफाई’ की वजह सोशल मीडिया होती है। बेंगलुरू के माइंड-बॉडी क्लीनिक के फाऊंडर श्याम भट्ट ने बताया, दरअसल, फेसबुक और बाकी सोशल मीडिया नोस्टेल्जिया बढ़ाते हैं और पिछली जिंदगी को कभी भुलाने नहीं देते। साथ ही, यह आपको लगातार विकल्प की वास्तविकता की झलक पेश कर चीजों को और खराब बना देता है।


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