आखिरी मुख्यमंत्री के रूप में इतिहास में दर्ज होंगे किरण रेड्डी

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Thursday, February 20, 2014-2:32 PM

हैदराबाद: यदि केंद्र सरकार ने तेलंगाना राज्य का गठन होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का फैसला ले लिया तो नल्लारी किरण कुमार रेड्डी संभवत: अविभाजित आंध्र प्रदेश के अंतिम मुख्यमंत्री के रूप में इतिहास में दर्ज हो जाएंगे। राज्य का बंटवारा रोकने में विफल रहने के बाद किरण रेड्डी ने बुधवार को न केवल अपने पद से, बल्कि कांग्रेस पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। जैसा कि किरण रेड्डी (53) ने स्वीकार किया कि छह दशकों तक जिस पार्टी से उनका परिवार जुड़ा रहा है उससे अलग होने का फैसला लेना उनके लिए आसान नहीं था।

 

पिछले वर्ष जुलाई में राज्य का बंटवारा करने के पार्टी नेतृत्व के फैसले का विरोध करने के बाद किरण रेड्डी ने अंतत: अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए तेलुगू भाषी लोगों को बांटने के फैसले को अन्यायपूर्ण बताया है। 25 नवंबर 2010 को किरण रेड्डी ने राज्य के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। जिस समय वे सत्तारूढ़ हुए थे, राज्य में तेलंगाना के पक्ष और विपक्ष में प्रदर्शन जोरों पर था और वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी के विद्रोह के कारण कांग्रेस असहज स्थिति में थी।

 

कांग्रेस ने के. रोसैया की जगह मुख्यमंत्री पद के लिए किरण रेड्डी का चयन किया। किरण रेड्डी उस समय विधानसभा के अध्यक्ष थे। रोसैया स्थितियों पर नियंत्रण पाने में असमर्थ महसूस कर रहे थे। हैदराबाद में जन्मे किरण रेड्डी चार बार विधयायक चुने गए हैं। अभी वे विधानसभा में चित्तूर जिले के पिलेर का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह क्षेत्र रायलसीमा में है। पृथक तेलंगाना का विरोध करते हुए भी उन्होंने कभी इस बात को नहीं भुलाया कि किस तरह हैदराबाद में स्कूल में शिक्षा पाने के दौरान वे क्रिकेट खेला करते थे।

 

हैदराबाद भौगोलिक रूप से तेलंगाना का हिस्सा है। कांग्रेस के फैसले को चुनौती देकर किरण रेड्डी समैक्यआंध्र या एकजुट आंध्र के न सिर्फ सबसे बड़े पैरोकार, बल्कि हैदराबाद में सीमांध्र (रायलसीमा और तटीय आंध्र) के लोगों के हितों के सबसे बड़े समर्थक बनकर उभरे। मुख्यमंत्री बनने से पहले किरण रेड्डी कभी किसी मंत्री पद पर भी नहीं रहे। अपने भाषणों में हमेशा वे पार्टी कार्यकर्ताओं से कड़ी मेहनत करने की सलाह देते थे।

 

हैदराबाद में 13 सितंबर 1960 को जन्मे किरण रेड्डी कांग्रेस के दिवंगत नेता और राज्य के पूर्व मंत्री एन. अमरनाथ रेड्डी के बेटे हैं। अमरनाथ को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पी. वी. नरसिंह राव का करीबी माना जाता था। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक की डिग्री ली। पहली बार वे वायलापाड़ विधानसभा क्षेत्र से 1989 में चुने गए। 1994 का चुनाव वे हार गए थे लेकिन 1999 और 2004 में वे फिर चुने गए। वर्ष 2009 के चुनाव में वे पिलेर से चुने गए।


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