मिलती रहेगी सस्ती बिजली

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Friday, February 21, 2014-12:15 AM
(ताहिर सिद्दीकी):आम आदमी पार्टी सरकार की ओर शुरू की गई बिजली की दरों में 50 फीसदी की कमी का लाभ घरेलू उपभोक्ताओं को आगे भी मिलता रहेगा। 6 महीने के लेखानुदान में इसके लिए दी जाने वाली सब्सिडी के खर्चे को भी शामिल कर लिया गया है।
 
उपराज्यपाल नजीब जंग ने वीरवार को इसे संसद की मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया। इसी तरह रोजाना 667 लीटर मुफ्त पानी की योजना का लाभ भी उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा।
 
पूर्ववर्ती सरकार ने बिजली की कीमतों में 50 फीसदी की कमी का लाभ घरेलू उपभोक्ताओं को देने के लिए 31 मार्च तक की सब्सिडी की मंजूरी विधानसभा से करा ली थी। लेकिन इसका लाभ 31 मार्च के बाद भी मिलेगा या नहीं इसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इस बीच उपराज्यपाल ने वित्त विभाग को 6 महीने का लेखानुदान तैयार करने का आदेश दिया ताकि संसद से मंजूरी लेकर आवश्यक बजट जुटाया जा सके।
 
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के सभी फैसलों को जारी रखने के लिए लेखानुदान में इसके लिए जरूरी खर्चे को भी शामिल कर लिया गया है। इसी के तहत 400 यूनिट बिजली खर्च करने वालों को बिजली की दरों में 50 प्रतिशत की छूट 31 मार्च के बाद भी जारी रहेगी। 
 
इससे करीब 34 लाख 61 हजार उपभोक्ता यानी 82 प्रतिशत जनता लाभान्वित होगी। फैसले को जारी रखने से 0 से 200 यूनिट तक बिजली की दर 1.95 रूपए तथा 200 से 400 यूनिट खपत करने वालों को 2.90 रूपए की दर से बिजली के दाम चुकाने होंगे। 400 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करने वालों को इस दायरे से बाहर रखा गया है। 
 
कर्मचारियों को वेतन देने का भी बजट नहीं :  दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद उपराज्यपाल ने 18 फरवरी को दिल्ली सरकार के सभी सचिवों की बैठक बुलाई। वरिष्ठ अधिकारियों ने उपराज्यपाल को सलाह दी कि राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा बजट पास कर सकते हैं। इसी सलाह को मानते हुए उपराज्यपाल ने अधिकारियों को बजट तैयार करने के लिए 10 दिन का समय दिया, लेकिन बुधवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अध्यादेश द्वारा लेखानुदान पास करने से मना कर दिया।
 
 असल में, वरिष्ठ अधिकारी उपराज्यपाल को बताना भूल गए कि जब संसद सत्र चल रहा हो तो आध्यादेश की प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती। इससे आकस्मिक स्थिति उत्पन्न हो गई और उपराज्यपाल ने अधिकारियों को बजट तैयार करने की समय सीमा 10 दिन से घटाकर एक दिन कर दी।
 
ऐसे में अब दिल्ली सरकार के पास मार्च महीने का वेतन भुगतान करने का बजट भी नहीं है। उल्लेखनीय है कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन महीने की आखिरी तारीख को मिलता है, लेकिन मार्च का वेतन 1 अप्रैल को मिलता है। राज्य सरकार के कर्मचारियों को समय से वेतन का भुगतान किया जा सके इसके लिए संसद से लेखानुदान पास कराना आवश्यक है।   

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