राष्ट्रपति शासन के खिलाफ आप की याचिका पर सोमवार को सुनवाई

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Friday, February 21, 2014-4:44 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट दिल्ली विधानसभा को भंग करने और नए चुनाव कराए जाने का निर्देश देने के आग्रह वाली आम अदामी पार्टी की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने पर सहमत हो गई है। दलील दी गयी है कि 16 फरवरी के राष्ट्रपति शासन लागू करने के फैसले का मकसद भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में चल रही जांच में अड़ंगा पैदा करने का है जिसमें अरविंद केजरीवाल सरकार ने एफआईआर दर्ज कराई। 

याचिका में कहा गया है कि स्पष्ट तौर पर, दिल्ली विधानसभा को भंग नहीं करने और ताजा चुनाव नहीं करवाने के पीछे का मकसद दिसंबर 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से पराजित होने वाली एक राजनीतिक पार्टी तथा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रही पूर्व मुख्यमंत्री व केंद सरकार में मंत्रियों सहित कई नेताओं को बचाने का है।  याचिका के मुताबिक, ‘‘...केंद्र सरकार के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली पर शासन करने के लिए...क्योंकि फिलहाल वही पार्टी केंद्र में में सत्ता में है और भ्रष्टाचार के उन मामलों में चल रही जांच में अड़ंगा डालने के लिए जिसमें दिल्ली सरकार की ओर से हाल में एफआईआर दायर करायी गयी।’’  

याचिका में कहा गया है, ‘‘इसलिए उपर्युक्त फैसला न केवल मनमाना और अवैध है बल्कि दिल्ली के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है और गलत नीयत से किया गया है।’’   याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन लागू करने का फैसला ‘अवैध, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है क्योंकि अरविंद केजरीवाल सरकार के इस्तीफे के बाद न तो भाजपा और न ही कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में है और इस संबंध में वे पहली ही अपनी अनिच्छा जाहिर कर चुके हैं।


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