बिजली बिल माफी पर कोर्ट की रोक

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Saturday, February 22, 2014-2:11 AM
नई दिल्ली : बिजली बिल माफी के मामले में आप सरकार के फैसले के बाद खुशी मना रहे लोगों की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली कैबिनेट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसके तहत बिजली का बिल न भरने वाले लोगों के बिल 50 प्रतिशत तक माफ कर दिए गए थे।
 
गौरतलब है कि अक्तूबर, 2012 से दिसम्बर 2013 के बीच जिन लोगों ने बिल नहीं भरे थे, आप सरकार ने उनके बिलों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी थी। लगभग 24036 लोगों के बिल इस फैसले के तहत माफ किए जाने थे।
 
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बी.डी. अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है और कहा है कि एक हलफनामा दायर करके बताएं कि अभी इस आदेश की क्या स्थिति है। अब इस मामले में 18 मार्च को सुनवाई होगी। खंडपीठ ने कहा कि इसी बीच कैबिनेट के 12 फरवरी के निर्णय पर रोक लगी रहेगी। 
खंडपीठ ने यह आदेश सरकार की तरफ से दायर हलफनामे को देखने के बाद दिया है। 19 फरवरी को खंडपीठ ने सरकार से कहा था कि वह इस मामले में अपना हलफनामा दायर करे। परंतु हलफनामे में दिए तथ्यों पर सरकार ने नाराजगी जताई। खंडपीठ ने कहा कि इन तथ्यों को देखने से यह पता नहीं चल रहा है कि अभी क्या स्थिति है। यह सब पुराने तथ्य हैं। हमें वर्तमान में क्या हो रहा है उसके बारे में जानना है।
 
विवेक नारायण शर्मा नामक व्यक्ति ने न्यायालय में दायर याचिका में कहा है कि अक्तूबर 2012 में आप पार्टी ने बिजली की बढ़ी कीमतों के खिलाफ एक आंदोलन चलाया था, जो दिसम्बर 2013 तक जारी रहा था। इसके तहत लोगों से बिजली का बिल न देने का आग्रह किया गया था। इस दौरान 24 हजार 36 लोगों ने अपने बिल नहीं दिए और वह डिफॉल्टर हो गए। इसी दौरान 2508 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। अब 12 फरवरी को सरकार ने इन लोगों के 50 प्रतिशत बिल माफ कर दिए हैं और जो मामले दर्ज हुए हैं उनको वापिस लेने की बात     कही है।

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