गांधी नगर कपड़ा उद्योग को मझधार में छोड़ा

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Saturday, February 22, 2014-1:13 PM

नई दिल्ली: पचास हजार से अधिक कामगारों के भविष्य को पूर्वी दिल्ली नगर निगम (इडीएमसी) ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है। गांधी नगर में चल रही सीलिंग के बीच हजारों लोगों की आजीविका बचाने और उनके जीवन को पटरी पर लाने के लिए फिलहाल उसके पास कोई वैकल्पिक विकल्प नहीं है। न्यायालय की लड़ाई भी फैक्ट्री मालिकों को अकेले ही लडऩी होगी। कानूनी मोर्चे पर मदद पहुंचाने को लेकर भी इडीएमसी अधिकारियों ने हाथ खड़े कर लिए हैं। 

इडीएमसी अधिकारी यह मानते तो है कि सीलिंग के बाद गांधी नगर में बड़े पैमाने पर आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा लेकिन वे उच्च न्यायालय के आदेश को मजबूरी बताते हैं। हालांकि, इडीएमसी के महापौर रामनरायण दूबे ने कहा कि फैक्ट्रियां खाली करने के बाद गांधी नगर व आस-पास के क्षेत्रों में कपड़ा उद्योग को नए सिरे से घरेलू उद्योग के तहत लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं, जिसमें पांच किलोवॉट तक का उद्योग चलाया जा सकता है।   

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गांधी नगर, महिला कालोनी, कैलाश नगर समेत अन्य क्षेत्रों में इडीएमसी द्वारा सीलिंग अभियान चलाया जा रहा है। इडीएमसी अधिकारियों का कहना है कि आदेश पर अमल के लिए उच्च न्यायालय ने तो मात्र 24 घंटे की ही मोहलत दी थी, उसमें ही दो माह की देरी हो चुकी है। करीब 20 प्रतिशत फैक्ट्रियां अभी सील हुई है। कपड़ा उद्योग को बचाने में इडीएमसी की उदासीनता के सवाल पर सफाई देते हुए दूबे ने कहा कि फैक्ट्री मालिक खुद भी पूर्व में समय-समय पर इडीएमसी द्वारा लाइसेंस के लिए चलाए गए अभियान की जानकारी ले सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। फैक्ट्री मालिकों का आरोप है कि सात माह बाद अचानक इडीएमसी ने दस्तावेज की कमी का आधार बताते हुए घरेलु लाइसेंस का आवेदन खारिज कर दिया। फिर 24 घंटे के भीतर ही फैक्ट्री खाली करने का फरमान सुना दिया। 

वहीं, शाहदरा-साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर अमजद टाक ने इडीएमसी का बचाव करते हुए कहा निगम ने लाइसेंस जारी करने के लिए अभियान चलाया था, तब फैक्ट्री मालिक नहीं चेते। उन्होंने कहा फैसला या कार्रवाई अचानक नहीं है। पूरा मामला कई सालों से निचली अदालत फिर उच्च न्यायालय में चला, जो सबकी जानकारी में था। इडीएमसी की तरफ से उच्चतम न्यायालय से स्टे आर्डर लाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पूरे मामले में इडीएमसी पक्षकार नहीं थी। जो जानकारियां न्यायालय द्वारा मांगी जाती रही,बस वह देती रही। 

 

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