इस बार संसद सत्र में अच्छे विधेयक पास हुए: सुषमा स्वराज

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Saturday, February 22, 2014-5:39 PM

नई दिल्ली: भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले 6 विधेयकों को संसद से पारित कराने में विपक्ष द्वारा सहयोग नहीं किए जाने के राहुल गांधी के आरोप को खारिज करते हुए भाजपा ने आज कहा कि इस दुराचार के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पिछले 10 साल में एक शब्द नहीं बोले और भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में शामिल होने की उनकी दावेदारी ‘ईमानदार’ नहीं है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में राहुल सबसे देर से शामिल हुए हैं। पिछले दस साल से संप्रग शासन भ्रष्टाचार का शिकार रहा है और इतने वर्षो में वह इस संबंध में एक शब्द नहीं बोले। लेकिन अब वह दावा पेश कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का मुद्दा उनका (कांग्रेस) है।’’

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इसमें जोड़ते हुए कहा, राहुल न सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में देर से शामिल हुए हैं बल्कि अपने प्रयासों में वह ‘‘ईमानदार’’ भी नहीं हैं। जेटली और स्वराज ने संसद के शीतकालीन सत्र के कल समापन के बाद आज यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में संसद में भ्रष्टाचार निरोधी अन्य विधेयक पारित नहीं हो सकने के लिए कांग्रेस और संप्रग सरकार को दोषी ठहराया।  सुषमा ने कहा कि संसद में हंगामा सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने किया ...ये कांग्रेस और उसका नेतृत्व है जो अपने सांसदों पर नियंत्रण खो चुका है।


विपक्ष की नेता ने कहा, संप्रग सरकार का शासन भ्रष्टाचार से भरा रहा लेकिन राहुल कभी भी उसके खिलाफ नहीं बोले।  उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार विरोधी माहौल बनने पर राहुल का इस लड़ाई में शामिल होना ईमानदार प्रयास नहीं कहा जा सकता है और ‘‘यह ऐसा है कि सौ चूहे खा कर बिल्ली चली हज को।’’ जेटली ने सवाल किया कि कांग्रेस उपाध्यक्ष उस समय क्यों खामोश बैठे रहे जब एक के बाद एक 2जी स्पेक्ट्रम, कोयला ब्लाक आवंटन, राष्ट्रमंडल खेल, आदर्श हाउसिंग सोसायटी और वीवीआईपी हैलिकाप्टर जैसे घोटाले सामने आ रहे थे।

 यह पूछे जाने पर कि संसद से पारित नहीं हो सके भ्रष्टाचार निरोधी 6 विधेयकों को सरकार अगर अध्यादेश के रूप में लागू करेगी तो क्या भाजपा उसका समर्थन करेगी, जेटली और सुषमा दोनों ने कहा, एक तो यह काल्पनिक प्रश्न है और दूसरे, अध्यादेश को समर्थन देने अथवा विरोध करने का सवाल तो बनता ही नहीं है। 15वीं लोकसभा का अंतिम सत्र समाप्त हो चुका है और अब इसका कोई अन्य सत्र नहीं होगा।

जेटली ने कहा कि अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा हमें देखना होगा कि चुनाव आदर्श संहिता कब से लागू होती है। इस सब को देखते हुए लगता है कि संभवत चुनाव के बाद बनने वाली नयी सरकार इन अध्यादेेशों का अनुमोदन कर पाएगी। राहुल ने कल संकेत दिया था कि इन भ्रष्टाचार निरोधी विधेयकों को लेकर अध्यादेश जारी किए जा सकते हैं। इन विधेयकों में सार्वजनिक खरीद विधेयक, इलेक्ट्रानिक सेवा एवं माल डिलीवरी विधेयक, विदेशी अधिकारी भ्रष्टाचार निवारण विधेयक, नागरिक चार्टर विधेयक शामिल हैं।


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