सिख समूहों की चेतावनी: यदि अल्पसंख्यक अधिनियम को कमजोर किया तो. . .

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Saturday, February 22, 2014-6:20 PM

श्रीनगर: कश्मीर के एक सिख संगठन ने आज कहा कि यदि राज्य में सरकार ने अल्पसंख्यक कानून के प्रावधानों को कमतर करने या उनमें बदलाव लाने का प्रयास किया तो उनके समुदाय के सदस्य उन्हें राज्य के निवासी के तौर पर मिले अधिकारों को विरोधस्वरूप त्याग देंगे।

सर्वदलीय सिख समन्वय समिति (एपीएससीसी) के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने यहां एक बयान जारी कर कहा, ‘‘हम राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम को कमतर करने अथवा उसमें बदलाव करने के कदम के खिलाफ हैं। संसदीय समिति की इस अधिनियम के संबंध में दी गई सिफारिशें पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं और उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।’’

यह दावा करते हुए कि विभिन्न राजनीतिक दलों का कश्मीरवासियों के प्रति रवैया हमेशा विवाद का विषय रहा है उन्होंने कहा कि ये नेता निहित स्वार्थी तत्वों, लोगों या एजेंसियों द्वारा दी जाने वाली गलत जानकारी से प्रभावित हो जाते हैं ।

उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी ने हमेशा ही कश्मीर के प्रति नीतियों को नुकसान पहुंचाया है। इस समय भी जो रवैया अपनाया गया है और राज्य सरकार को जो सिफारिश की गई है वह वास्तविक अल्पसंख्यकों यानी सिखों के खिलाफ है। हम पूरे जोरशोर से उन सिफारिशों का विरोध करेंगे जो भारत सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए तय किए गए मौजूदा कायदे कानूनों का उल्लंघन करती हैं।

एक संसदीय समिति ने हाल में जम्मू कश्मीर सरकार से कहा कि वह राज्य में कश्मीरी पंडितों की शोचनीय स्थिति को देखते हुए उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा देने के मामले की जांच करे। इन लोगों को आतंकवादी गतिविधियों के कारण घाटी छोडऩे को मजबूर होना पड़ा था।


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