नर्सरी दाखिलों में विकलांग बच्चों के कोटे के मामले में कोर्ट ने जारी किया नोटिस

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Saturday, February 22, 2014-10:00 PM
नई दिल्ली : नर्सरी दाखिलों में विकलांग बच्चों के लिए आरक्षित कोटे को भी आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों के कोटे में जोडऩे संबंधी उपराज्यपाल के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
 
दायर जनहित याचिका में सभी सहायता व गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में विकलांग बच्चों के लिए तीन प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का निर्देश देने का आग्रह किया है। जनहित याचिकाकर्ता प्रमोद अरोड़ा के अधिवक्ता कीर्ति उप्पल ने 18 दिसंबर 2013 को उपराज्यपाल द्वारा नर्सरी दाखिलों के संबंध में जारी दिशा निर्देश को रद्द करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा उपराज्यपाल के आदेश से विकलांग बच्चों के अधिकारों व शिक्षा पाने के अधिकार का हनन हुआ है।
 
न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट व न्यायमूर्ति आरवी इश्वर की खंडपीठ ने मानव संसाधन मंत्रालय व दिल्ली सरकार शिक्षा विभाग को 25 फरवरी तक स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों व याचिका स्वीकार कर ली जाए। अधिवक्ता उप्पल ने तर्क रखा कि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चे भी विशेष सहायता पाने के हकदार है लेकिन उससे भी ज्यादा सहायता विकलांग बच्चों को मिलनी चाहिए। उन्होंने पहले से विकलांग बच्चों के लिए दाखिलों में तीन प्रतिशत सीटें आरक्षित थी लेकिन अब सभी सीटें मिला दी गई है।
 
उन्होंने कहा हर स्कूल में कमजोर वर्ग के बच्चों के चार-चार आवेदन आने के बाद आवेदन लेने की प्रक्रिया बंद कर दी गइ। वहीं विकलांग बच्चों के आवेदन मात्र 15 के करीब ही आए है। ऐसे में लाटरी सिस्टम से दाखिलें प्रदान करने की प्रक्रिया में विकलांग बच्चे दाखिलों से पिछड़ जाएंगे।
 

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