निर्मल गंगा के लिए कानून बनाने की मांग

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Sunday, February 23, 2014-12:31 AM
नई दिल्ली : गंगा में बढ़ते प्रदूषण और उसकी जलधारा के प्रवाह में बाधा से चिंतित धर्मगुरुओं, चिंतकों एवं नेताओं ने उत्तर और पूर्वी भारत की जीवनधारा गंगा की पवित्रता को बनाये रखने के लिए मन, वचन और कर्म के साथ प्रतिबद्धतापूर्वक आगे बढऩे और संसद से कानून बनाकर इसकी निर्मल एवं अविरल धारा सुनिश्चित करने की मांग की। 
 
ंतर मंतर पर शनिवार को विभिन्न धर्मो के गुरुओं ने निर्मल गंगा, अविरल गंगा की पुरजोर वकालत की और काफी संख्या में कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग के समर्थन में प्रदर्शन किया। 
 
साध्वी उमा भारती ने कहा कि गंगा को स्वच्छ रखने और इसकी अविरल धारा सुनिश्चित करने के लिए संसद में कई बार चर्चा हुई और अलग अलग स्तर पर चिंतकों ने अपनी बात रखी है । सभी इस बात से सहमत है कि गंगा नदी की पवित्रता बनाए रखना हमारे अस्तित्व के लिए जरूरी है। गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक गंगा आज कुछ लोगों के लिए सिर्फ संसाधन बन कर रही गई है और लोग भविष्य की चिंता किए बिना अपने स्वार्थ के लिए इसे प्रदूषित कर रहे हैं और विकास के नाम पर इसकी अविरल धारा को बाधित करने का काम कर रहे हैं।
 
गोविंद शर्मा ने कहा कि गंगा समेत देश के अनेक क्षेत्र में नदियों में शहर का गंदा पानी बहाया जा रहा है, नदियां प्रदूषित हो रही है, उनका बहाव क्षेत्र घट रहा है जिसका दुष्परिणाम हमें कई बार देखने को मिला है । 
 
चिंतकों ने कहा कि गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा की अविरल जलधारा सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता और लोगों की जागरूकता जरूरी है क्योंकि ऐसी पवित्र नदी में बढ़ता प्रदूषण और जलधारा में कृत्रिम बाधा गंभीर चिंता का विषय है। सवाल गंगा के अस्तित्व का ही नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का भी है।

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