चंदा सार्वजनिक करने का आदेश खटाई में

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Monday, February 24, 2014-1:08 AM
नई दिल्ली (अजीत के सिंह): व्यावसायिक घरानों से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को सार्वजनिक करने की बाध्यता वाले नियम को तत्काल प्रभाव में आने से रोक दिया गया है। 
 
सूत्रों की मानें तो इस नियम को राजनीतिक दलों और औद्योगिक संगठनों के दबाव में प्रभाव में आने से रोका गया है। गौरतलब है कि कंपनी मामलों का मंत्रालय पिछले साल ही एक आदेश जारी करने वाला था, जिसके अनुसार सभी राजनीतिक दलों को चंदे की रकम के साथ चंदा देने वाले सभी व्यावसायिक घरानों के नाम सार्वजनिक करने पड़ते। 
 
हालांकि आदेश जारी होने से पहले ही कुछ औद्योगिक संगठनों ने मंत्रालय को एक पत्र लिखकर दरख्वास्त की थी कि  वहइस संदर्भ में कोई आदेश जारी नहीं करें। आमतौर पर राजनीतिक दल 75 से 85 फीसदी चंदे का सोर्स सार्वजनिक नहीं करते। हालांकि आम आदमी पार्टी देश की इकलौती पार्टी है जो कि अपने चंदे का सोर्स जाहिर करती है। 
 
मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राजनीतिक दलों को अभी सबसे ज्यादा चंदा उत्पादन क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों से आता है। राजनीतिक दलों को चंदा देने में दूसरा स्थान रियल स्टेट कंपनियों और तीसरा स्थान अस्पतालों का होता है। 
 
पिछले कुछ सालों से देश के कुछ बड़े स्कूलों ने भी राजनीतिक पार्टियों को चंदे देने शुरू कर दिए हैं। अभी के नियम के अनुसार राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग को अपने चंदे का स्रोत बताना पड़ता है लेकिन राजनीतिक दल तकरीबन 75 फीसदी चंदे का स्रोत अज्ञात बताते हैं। 

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