नेताओं के अनुयायी सामर्थ्यवान हों: भागवत

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Monday, February 24, 2014-8:37 AM

भोपाल: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि नेताओं के पास अनुयाइयों का होना जरूरी है, साथ में उनका सामर्थ्यवान होना चाहिए। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में संघ के स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए भागवत ने संघ के पथ संचलन की सराहना करते हुए कहा कि शारीरिक कार्यक्रम बहुत अच्छा हुआ, किन्तु यदि संतोष हो जाए तो उसका अर्थ होता है विकास पर विराम और अच्छा होने की कोई सीमा रेखा नहीं होती।

 

उन्होंने आगे कहा कि किसी व्यक्ति, संस्था अथवा देश की सफलता के लिए भी यही दृष्टि आवश्यक है। नेता के अनुसार चलने वाले अनुयाई भी आवश्यक हैं, रणभूमि में ताना जी मौलसिरे की मृत्यु के बाद यदि अनुयाईयों में शौर्य नहीं होता तो क्या कोंडाना का युद्घ जीता जा सकता था? भागवत ने आगे कहा कि नेता और जनता दोनों के मन में निस्वार्थ भाव से बिना किसी भेदभाव के देश को बढ़ाने का भाव हो तभी देश का भाग्य बदल सकता है। संघ ने शाखा के माध्यम से घर-घर, गांव-गांव में शुद्घ चरित्र वाले लोगों को साथ लेकर चलने वाले निस्वार्थ लोग खड़े करने का कार्य हाथ में लिया है। समाज का चरित्र बदले तभी देश का भाग्य बदलेगा।

 

पथ संचलन की चर्चा करते हुए भागवत ने कहा कि शारीरिक कार्यक्रम कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं है, हिन्दू समाज को शक्ति संपन्न बनाने के लिए हैं। आवश्यक गुण संपदा इन्हीं कार्यक्रमों से प्राप्त होती है। राष्ट्र उन्नति हो, दुनिया सुखी हो इसके लिए हर घर, गांव शहर में मनुष्य को परिष्कृत किया जाना जरुरी है। जैसे लोटा रोज मांजा जाता है, उसी प्रकार स्वयं को भी रोज मांजना होगा। यह नहीं मानना चाहिए कि मैं कभी मैला नहीं हो सकता।


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