समोसे में आलू तो है, बिहार में लालू खत्म!

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Monday, February 24, 2014-7:19 PM

बिहार: बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि 2014 का साल उनके सियासी सूर्य के अस्त होने का गवाह बनेगा। सोमवार को लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में हुई टूट के बाद लालू अब 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में महज 9 सीटों पर सिमट गए हैं। लालू ने 1995 में वह दौर भी देखा है जब झाडख़ंड बिहार का हिस्सा था और इस संयुक्त बिहार में लालू की तूती बोलती थी। 1995 के विधानसभा चुनाव के दौरान संयुक्त बिहार की 324 में से 167 सीटें लालू की अध्यक्षता वाली जनता दल ने जीती थी।

उस समय बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा कहा गया यह जुमला बहुत मशहूर था कि समोसे में आलू रहे या न रहे लेकिन बिहार में लालू जरूर रहेगा लालू को अपने मुस्लिम यादव समीकरण पर इतना भरोसा था कि वह इस मुगालते में रह गए कि बिहार में उनका कोई तोड़ नहीं है। लेकिन जब 2000 में जनता दल की टूट के बद जनता दल यूनाइटेड अस्तित्व में आया तो लालू सत्ता से बाहर हो गए हाला कि उस वक्त भी लालू की पार्टी प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन दिसंबर 2000 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हुए मध्यावधि चुनाव के दौरान लालू सत्ता से बाहर हो गए। हाला कि 2004 के लोकसभा चुनाव ने लालू को एक बार फिर ताकत दी और लालू केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री बन गए।

पिछले साल के अंत में सीबीआई कोर्ट द्वारा उन्हें चारा घोटले में दोषी ठहराए जाने के बाद लालू के सियासी जीवन का लगभग अंत निश्चित हो गया क्योकिं इस सजा के साथ ही लालू के 11 साल तक चुनवा लडऩे पर भी रोक लग गई। हालाकि 2 दिन पहले ही एक न्यूज चैनल को दिए गए इंटरव्यू में लालू ने एक बार फिर देश का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई थी। लेकिन सोमवार को लालू की हुई टूट से लालू के सियासी सपने बिखर कर रह गए हैं।


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