दिल्ली में राष्ट्रपति शासन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा 10 दिन में जवाब

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Monday, February 24, 2014-7:35 PM
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने  दिल्ली में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से 10 दिनो के भीतर प्रतिक्रिया मांगी है। आप सरकार की ओर से दाखिल की गई विधान सभा भंग करने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजते हुए उससे जवाबदेही मांगी है। इस पर सोमवार को प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई की। साथ ही सुनवाई के लिए अगली तारीख 7 मार्च तय की।
 
 
आम आदमी पार्टी  दिल्ली ने राष्ट्रपति शासन लगने के खिलाफ पिछले सप्ताह कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पार्टी का मानना है कि केंद्र द्वारा दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाना गलत है। अरविंद केजरीवाल की ओर से कहा गया है कि एक बहुमत वाली सरकार के निर्णय को उप राज्यपाल मानने के लिए बाध्य हैं।
 
अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने के बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। आप ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी दाखिल कर विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी।
 
इससे पहले आम आदमी पार्टी के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि दिल्ली में किसी वैकल्पिक सरकार की संभावना नहीं है और उपराज्यपाल को विधानसभा भंग कर देना चाहिए।केजरीवाल का कहना है कि कोई भी सरकार बहुमत में है या नहीं इसका फैसला विधानसभा में विश्वास मत द्वारा होता है या फिर वित्त विधेयक पास कराकर। हमारी सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत भी जीता है और वित्त विधेयक को भी पास करवा लिया था। फिर दिल्ली सरकार की सिफारिश को उप राज्यपाल ने किस नियम के तहत नहीं माना। केजरीवाल का मानान है कि संविधान के मुताबिक एक बहुमत वाली सरकार की हर सिफारिश को मानने के लिए दिल्ली के उप राज्यपाल बाध्य हैं।
 

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