आशुतोष महाराज की संपत्ति को सार्वजनिक मानने से इन्कार

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Tuesday, February 25, 2014-5:28 AM

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की संपत्ति को सार्वजनिक मानने से इन्कार कर दिया है। इस संबंध में दायर बसपा नेता मङ्क्षहद्र पाल सिंह की याचिका को जनहित श्रेणी का न मानते हुए सोमवार को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। संस्थान का दावा है कि आशुतोष महाराज पिछले कई दिनों से समाधि में लीन हैं जबकि हाईकोर्ट में पंजाब सरकार उन्हें क्लीनिकली डैड मान चुकी है।

चीफ जस्टिस संजय किशन कौल की खंडपीठ के समक्ष दायर याचिका में बसपा नेता ने कहा था कि आश्रम का पैसा लोगों का है और इसका इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए। याचिका में कहा गया कि लोगों द्वारा जमा किया गया पैसा करीब 1 हजार करोड़ आंका गया है। जनकल्याण में इसके इस्तेमाल का सबसे अच्छा तरीका ट्रस्ट बनाना है। ट्रस्ट को ही जिम्मेदारी दी जाए कि पैसे का जनहित में कैसे इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने अपील की थी कि इस संपत्ति के प्रयोग पर निगाह रखने के लिए हाईकोर्ट अपनी ओर से एक आयुक्त भी नियुक्त करे।

चीफ जस्टिस कौल ने याची की दलील सुनने के बाद कहा कि आशुतोष महाराज की संपत्ति पर दायर याचिका जनहित याचिका के दायरे में नहीं है।  उन्होंने याची से पूछा कि कैसे किसी संस्थान की संपत्ति सार्वजनिक संपत्ति मानी जा सकती है। कोई संतोषजनक उत्तर न मिलने पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

इस बीच आशुतोष महाराज के पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की मांग को लेकर दायर याचिका का पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकत्र्ता इस मुद्दे को लेकर पहले पुलिस के पास जाए। हाईकोर्ट से अपनी एक याचिका खारिज होने के बाद स्वयं को आशुतोष महाराज का पूर्व ड्राइवर बताने वाले पूर्ण सिंह ने एक और याचिका दायर कर महाराज के पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की मांग की थी।

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