हां, सही है कि छात्रों के अनुपात के अनुसार नहीं हैं अध्यापक: सरकार

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Tuesday, February 25, 2014-2:17 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज सरकार ने स्वीकार किया कि छात्रों की संख्या के अनुपात में अध्यापक नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुरेश राणा तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नीरज मौर्य और अरुण कुमार के सवाल के जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने कहा कि यह सही है कि छात्रों के अनुपात के मुताबिक अध्यापक नहीं हैं लेकिन भर्तियों के माध्यम से सरकार अध्यापकों की कमी को दूर करने के लिए बराबर प्रयास कर रही है।

चौधरी ने कहा कि कुल एक लाख दस हजार तीन सौ छिहत्तर प्राथमिक विद्यालयों में से 4583 में और 46503 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 1484 में एक भी नियमित अध्यापक नहीं हैं लेकिन आसपास के विद्यालयों से इन विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की वैकल्पिक व्यवस्था कर अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। वहां शिक्षामित्रों की पर्याप्त संख्या है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुसार 30 छात्रों पर एक अध्यापक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने अध्यापकों की भर्ती के लिए सतत प्रयासरत है। हजारों अध्यापकों की भर्ती की गयी है और भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि अध्यापकों की भर्ती के ही एक मामलें में उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गत 20 नवम्बर के आदेश के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि याचिका के निस्तारित होते ही
 

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