चीन से हर्बल उत्पादों का बढ़ता निर्यात हमारे लिए चुनौती: मोदी

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Tuesday, February 25, 2014-7:49 PM

गांधीनगर: चीन से जड़ी बूटियों से तैयार दवाओं के बढ़ते निर्यात को एक चुनौती मानते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत की पारंपरिक औषधि प्रणाली आयुर्वेद का वैश्वीकरण करने की जरूरत है। यहां महात्मा मंदिर में राष्ट्रीय आयुर्वेदिक सम्मेलन में मोदी ने कहा, ‘‘हर्बल दवाओं के निर्यात में चीन नंबर एक पायदान पर है।

चीन के विशाल निर्यात का मतलब है कि इस तरह के हमारे उत्पादों का एक वैश्विक बाजार है और इसमें जगह बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।’’उन्होंने कहा, ‘‘क्या कभी भारत ने सोचा है कि कितने देश पारंपरिक औषधि प्रणाली में भरोसा करते हैं। नेपाल, थाइलैंड, सुमात्रा, जावा और कई ऐसे देश हर्बल उत्पादों का उपयोग करते हैं।

हम आयुर्वेद को दुनिया में ले जाने के लिए ऐसे देशों का एक समूह बना सकते हैं।’’आयुर्वेद में नवीनतम प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल पर मोदी ने कहा कि सदियों पुरानी आयुर्वेदिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए और यह काम करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने अफसोस जताया कि भारत पेटेंट दाखिल करने में पिछड़ रहा है। ‘‘हमें आयुर्वेद में पेटेंट प्रणाली के संबंध में जागरूक होने की जरूरत है।

आयुर्वेदिक क्षेत्र को भी बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में विचार करना चाहिए।’’मोदी ने कहा, ‘‘महज यह कहना है कि हमारी चीजें सर्वोत्तम हैं, इससे काम नहीं चलेगा। हमें अपनी प्रौद्योगिकी को दुनिया के सामने उस भाषा में पेश करने की जरूरत है जिस भाषा में वे समझते हैं।’’

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