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हाईकोर्ट ने लगाई दिल्ली सरकार को फटकार

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Wednesday, February 26, 2014-2:19 AM
नई दिल्ली : सोमवार को एक बाल सुधार गृह में उत्पात मचाने के बाद 44 बच्चों के फरार हो जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी व निदेशक को सम्मन जारी कर रिपोर्ट तलब की। विभाग का पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि अगले 72 घंटे में सभी बाल होम में डी.जी.आर. (पुर्नवास महानिदेशालय, पूर्व सैनिक कल्याण विभाग) से सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं।
 
मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग के उस सुझाव पर भी कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें बताया गया कि विभाग बच्चों के बार-बार फरार होने की घटनाओं को देखते हुए इन बाल होम को तिहाड़ परिसर में शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है ताकि इन होम की सुरक्षा बनी रहे। खंडपीठ ने कहा कि जुवैनाइल जस्टिस एक्ट का अर्थ यह है कि इन बच्चों को जेल से दूर रखा जाए और उनको जेल परिसर में ही शिफ्ट करने की योजना बना रहा है।
 
न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट्ट व न्यायमूर्ति आर.वी. ईश्वर की खंडपीठ ने कहा कि विभाग को इन होम की सुरक्षा के लिए नए तरीके से सोचना चाहिए। अगर विभाग यह कह रहा है कि वह इनको सुरक्षित नहीं रख सकता है तो यह प्रशासनिक हार है।अदालत में कोर्ट मित्र अधिवक्ता ए.जे. बम्बानी ने भी विभाग के इस सुझाव का विरोध किया। उसने दलील दी कि बच्चों को विशेष स्थान पर रखना होता है, न कि जेल में। अगर उनको जेल में रखा गया  तो मानसिक तौर पर उनको ज्यादा प्रताडऩा होगी।
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