पैसे लेकर घालमेल होता है सर्वे में!

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Wednesday, February 26, 2014-5:54 AM

नई दिल्ली : क्या मीडिया में दिखाए जाने वाले सर्वे में आंकड़ों का घालमेल होता है? क्या पैसे देकर सीटें घटाई-बढ़ाई जा सकती हैं? टी.वी. न्यूज चैनल ‘न्यूज एक्सप्रैस’ ने सर्वे करने वाली 11 कम्पनियों के स्टिंग आप्रेशन करके कहा है कि इन कम्पनियों में कुछ भी हो सकता है। ‘न्यूज एक्सप्रैस’ ने सी-वोटर, क्यू.आर.एस., आकटेल और एम.एम.आर. जैसी सर्वे करने वाली कुल 11 बड़ी कम्पनियों का सिंटग आप्रेशन किया है।

चैनल के एडिटर इन चीफ विनोद कापड़ी ने कहा कि 4 अक्तूबर 2013 को एक चिट्ठी में चुनाव आयोग ने लिखा कि ओपिनियन पोल को लेकर दलों का क्या रुख है। उसके बाद हमने इन सर्वे की सच्चाई का पता लगाने के बारे में सोचा। स्टिंग आप्रेशन में दिखाया गया है कि कम्पनियों के अधिकारी पैसे लेकर आंकड़ों को इधर-उधर करने को राजी हो गए। ये कम्पनियां मार्जिन आफ एरर के नाम पर आंकड़ों में घालमेल करती हैं। सी-वोटर के प्रमुख यशवंत देशमुख ने इन आरोपों को गलत बताया है।

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