डेढ़ दर्जन मुन्नाभाई सीआईडी को दे रहे चकमा

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Wednesday, February 26, 2014-8:34 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ के तीन मेडिकल कॉलेजों में जिन 45 मुन्नाभाइयों (एमबीबीएस छात्र) के खिलाफ सीआईडी में अपराध दर्ज हैं, उनमें से डेढ़ दर्जन से भी ज्यादा 19 छात्र अभी भी सीआईडी की गिरफ्त से बाहर हैं। सीआईडी बीते दो साल में 25 छात्रों के विरुद्ध कोर्ट में चालान पेश कर चुकी है, इसी दौरान 1 छात्र की मौत हो गई, बचे डेढ़ दर्जन 19 जो अभी भी सीआईडी को चकमा दिए जा रहे हैं। हालांकि अफसर दावा कर रहे हैं कि जल्द ही शेष की गिरफ्तारी कर उनके विरुद्ध अदालत में चालान पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल कॉलेज रायपुर प्रबंधन ने कॉलेज में पढऩे वाले पांच मुन्नाभाई छात्रों को कॉलेज से निष्कासित करने का फैसला क्या लिया मुन्नाभाइयों के होश उड़ गए। मिली जानकारी के मुताबिक बीते दो दिन में 2 मुन्नाभाइयों ने कॉलेज में उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत के कागजात प्रस्तुत कर दिए हैं। इनके नाम हैं कुंदन कुमार कंगन (2008) और रोहित कुमार (2008)। शेष तीन छात्र श्वेता सोनवानी (2009), धर्मेंद्र कुमार (2009) और संजय कुमार खाण्डे (2009) ने अब तक कोई जमानती कागजात पेश नहीं किया है।

इन्हें सीआईडी ने पहले ही भगोड़ा  घोषित कर दिया है, लेकिन अब ये कॉलेज से भी निष्काषित किए जा चुके हैं। कुंदन कुमार कंगन और रोहित कुमार का निष्कासन रद्द करने से संबंधित फैसला अभी नहीं हुआ है। सीआईडी के डीएसपी शाहिद अली कहते हैं कि 45 मुन्नाभाइयों के खिलाफ सीडीआई के पास सबूत हैं। इनमें से 25 के विरुद्ध अदालत में चालान पेश किया जा चुका है। शेष बचे आरोपियों में 1 की मौत हो चुकी है और 19 के खिलाफ अदालत में चालान पेश करने हैं।

जल्द चालान पेश होंगे। बताया जाता है कि इन तीन भगोड़े मुन्नाभाइयों के अलावा बिलासपुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में पढऩे वाले 25 छात्र ऐसे हैं, जिनकी गिरफ्तारी में सीआईडी को पसीना छूट गया है। सीआईडी इनके घर से लेकर रिश्तेदारों तक के ठिकाने खंगाल चुकी है, लेकिन 25 छात्रों का कहीं कोई पता नहीं है। इन सबके विरुद्ध धोखाधड़ी का केस सीआईडी में पंजीबद्ध है और ये सभी छात्र 2007, 2008, 2009 और 2010 बैच के हैं।

साल 2010 में सुनील बरिया एमबीबीएस छात्र के पीछे पड़ी महासमुंद पुलिस ने प्रदेश में पहली बार मुन्नाभाइयों का खुलासा किया। खुलासा हुआ कि पीएमटी प्रवेश परीक्षा में आवेदन करने वाले की जगह दूसरा व्यक्ति बैठकर परीक्षा दे रहा है। सुनील बरिया की गिरफ्तारी के बाद मामला सीआईडी को सौंप दिया गया। और फिर एक के बाद एक धरपकड़ शुरू हो गई। एक नहीं दो नहीं बल्कि 45 छात्रों के विरुद्ध केस पंजीबद्ध हुआ। 14 अगस्त 2013 को पुलिस मुख्यालय अंतर्गत सीआईडी ने इन मुन्नाभाइयों की सूची डीएमई को सौंपी, जिनमें रायपुर मेडिकल कॉलेज के 18 छात्र-छात्राओं के नाम थे।

रायपुर मेडिकल कॉलेज में पढऩे वाले 18 मुन्नाभाई छात्रों के अलावा बिलासपुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में भी बड़ी संख्या में मुन्नाभाई पढ़ रहे हैं। जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में इनकी संख्या ज्यादा है। लेकिन अभी इन दोनों कॉलेज प्रबंधनों ने रायपुर मेडिकल कॉलेज जैसा निष्कासन संबंधी फैसला नहीं लिया है।

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