दूसरी शादी में अड़चन बनी थी 22 माह की मासूम, इसलिए बाप और दादी ने मार डाला

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Thursday, February 27, 2014-1:34 AM
नई दिल्ली: 19 दिसम्बर, 2013 की तारीख, जिस दिन कड़कडड़ूमा कोर्ट ने मासूम जानकी को उसकी मां रजनी से अलग करके पिता दीपक को सौंप दिया था। तभी रजनी ने रो-रोकर कहा था कि उसका पति जानकी को मार डालेगा। उस समय उसकी बात किसी ने नहीं सुनी थी।
 
लेकिन, बीती 19 फरवरी की दोपहर रजनी की बात सच हो गई। जानकी को उसी के पिता ने परिवार की सहायता से गला घोटकर मार डाला। पुलिस ने पिता दीपक और दादी ऊषा को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि जानकी के दादा नरेश और चाचा मोंटी को छोड़ दिया है।
 
लेकिन अभी उनको शक के दायरे में रखा हुआ है। मानसरोवर पार्क इलाके में हुई इस घटना में जानकी के ननिहाल वालों का कहना है कि दीपक दूसरी शादी करना चाहता था, लेकिन दो साल की बच्ची उसके रास्ते में अड़चन बन रही थी। इसी कारण उसने मासूम सी जान का कत्ल कर दिया। बच्ची के नाना राकेश ने कहा कि उनको पहले से ही शक था।
 
इसलिए अक्सर जानकी की आवाज सुनने के लिए दीपक आदि को फोन कर लिया करते थे। लेकिन पिछले कुछ दिन से दीपक और उसके परिवार के अन्य लोग बच्ची से बात नहीं करा रहे थे। कॉल करने पर मोबाइल स्वीच ऑफ कर दिया करते थे। जिससे उनको और ज्यादा डर लगने लगा था। 19, फरवरी की शाम को उनके पास दीपक के पड़ोसी ने फोन पर बताया कि जानकी की मौत हो गई है।
 
सूचना के तुरंत बाद वे परिवार समेत गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचे। जहां से पुलिस कंट्रोल रूम को जानकी की हत्या करने की रिपोर्ट की। पुलिस ने उनके बयान दर्ज कर लिये। वहीं आरोपियों ने बचने के लिए एक प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। 
 
राकेश ने बताया कि रजनी और दीपक की 5 मई 2011 को शादी हुई थी। लेकिन, जल्द ही रजनी को दहेज के लिए प्रताडि़त किया जाने लगा था। इस बीच 24 मार्च 2012 को जानकी पैदा हुई। उन्होंने बताया कि ससुराल वालों के खिलाफ शाहदरा पुलिस स्टेशन में 406/498 ए का केस दर्ज करया गया था। सुनवाई के दौरान 19 दिसम्बर, 2013 को कड़कडड़ूमा कोर्ट ने जानकी को दीपक की सुपुर्दगी में दे दिया था। कोर्ट ने जानकी के नाम से एक लाख रुपए की एफडी कराके 13 मार्च, 2014 तक कोर्ट को दिखाने की बात भी कही थी। 

13 किलो से 5 किलो की रह गई थी बच्ची
 
नई दिल्ली,26 फरवरी(महेश चौहान): 22 महीने की जानकी को जिस तरह से उसके पिता दीपक और दादी ऊषा ने मार डाला। उन्होंने इंसानियत को भी शर्मशार कर दिया है। बताया जाता है जानकी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर 24 पुराने चोट के निशान है। उसके सिर पर डंडे से वार कर रखा है। आखिरी दिनों में उसका वजन 13 किलो से 5 किलो रह गया था। 
 
बताया तो यह भी जा रहा है कि रिपोर्ट में यह भी आया है कि उसके पेट में खाना भी नही था। उसको दो -तीन दिन से खाना भी नही दिया गया था। पड़ोस में रहने वाले लोग बताते है कि जब से जानकी को दीपक घर लेकर आया था। उसके कुछ ही दिन बाद से जानकी को मारा पीटा जाने लगा था। 
 
जानकी हर वक्त अपनी मां को याद करती थी। उसको काफी बार घर की चौखट पर रोते हुए देखा गया है। 2 बार तो पड़ोसियों ने ही उसक चौखट से गिरते हुए बचाया था। स्थानीय लोग नाम तो नही बताते हैं। लेकिन जानकी के बारे में बताते हुए उनकी आंखों में आंसू आ जाते है। एक लड़की ने बताया कि जब भी जानकी रोती थी। उसकी मां उसे खुद गले से लगा लेती थी। वह पापा से कहती थीं कि जानकी की मां को फोन कर दो या फिर पुलिस को इस बारे में बता दो। अगर ऐसा नही किया तो जानकी को वो मार देगें। 
 
जब भी जानकी रोती थी कोई न कोई पड़ोसी घर की तरफ जाकर उसे देखने की कोशिश करता था। जानकी के रोने से पड़ोसियों का दिल पसीज जाता था लेकिन उसके हत्यारे घरवालों को दिल नही पसीजता था। पड़ोसी बताते हैं कि जानकी हर वक्त मां-मां  पुकारती रहती थी। जिस तरह से दुंधमुंही बच्ची को मारा है। भगवान ऐसा किसी के साथ न करे। यह मासूम पिता और दादी की नजरों में कांटे की तरह से चुभ रह थी। 
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