मिल सकेंगे परदेश में रहने वाले बच्चों से

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Thursday, February 27, 2014-11:34 AM
नई दिल्ली : न्यूजीलैंड में रह रहे अपने बच्चों से मिलने की आस में बैठे एक बुजुर्ग दम्पति का सपना अब सच हो पाएगा। दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस दम्पति को उनका जन्म प्रमाण पत्र जारी करें, ताकि उनकी इमीग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी हो सकें। अदालत ने दक्षिणी दिल्ली इलाके में स्थित कालकाजी के एस.डी.एम. को निर्देश दिया है कि वह 73 वर्षीय विश्वानाथ खन्ना व उनकी 60 वर्षीय पत्नी मधु खन्ना को 2 सप्ताह के अंदर जन्म प्रमाण पत्र जारी करें। अदालत ने कहा कि एस.डी.एम. अपने आदेश में यह साफ करें कि विश्वानाथ का जन्म 6 दिसम्बर 1940 व उनकी पत्नी का जन्म 28 अक्तूबर 1953 को हुआ था। सीनियर सिविल जज मनीष मड़कन ने कहा कि इसके अलावा एस.डी.एम. इनको जन्म प्रमाण पत्र भी जारी करें। मामले में समन जारी करने के बाद भी कोई पेश नहीं हुआ, जिसके बाद अदालत ने एक तरफा आदेश पास किया है। 
 
खन्ना दम्पति ने अपनी अर्जी में बताया था कि उन्होंने न्यूजीलैंड जाने के लिए इमीग्रेशन के लिए अप्लाई किया था, ताकि वह अपने बच्चों से मिल सकें। परंतु हाईकमीशन ने उनको बताया कि इसके लिए उनको अपना जन्म प्रमाण पत्र लाना होगा। इसके बाद उन्होंने एस.डी.एम. के पास जन्म प्रमाण पत्र के लिए अप्लाई किया तो यह कहते हुए उनकी अर्जी रद्द कर दी कि वह 1940 व 1953 में पैदा हुए हैं। ऐसे में एस.डी.एम. उनको प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकता है। दम्पति ने कोर्ट में मांग की थी कि एस.डी.एम. को निर्देश दिया जाए कि उनके वोटर आई कार्ड व पासपोर्ट में लिखी जन्म तिथि के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
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