दिल्ली के थानों से गायब हुईं महिला एस.एच.ओ.

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Friday, February 28, 2014-10:59 AM
नई दिल्ली (कुमार गजेन्द्र) : दिल्ली के थानों से महिला एस.एच.ओ. गायब होती जा रही हैं। पुलिस में महिलाओं की इस उपेक्षा के पीछे आला अधिकारियों की महिलाओं के प्रति लगातार बढ़ रही विमुखता दिखाई दे रही है। अधिकारियों को लगता है कि महिला इंस्पैक्टर इलाके को पूरा समय नहीं दे पाती हैं।
 
महिला इंस्पैक्टरों के लिए थानों के अलावा उनका अपना परिवार भी होता है। जिसे समय देना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिससे कम से कम महिलाओं को थानों की जिम्मेदारी दी जाए। 
 
पूर्व पुलिस आयुक्त वाईएस डडवाल ने अपने समय में कई महिलाओं को थानों की जिम्मेदारी दी थी। उन्हीं के समय में रेड लाइट एरिया के थाना कमला मार्कीट में सुरेन्द्रजीत कौर को एस.एच.ओ. बनाया गया था। 
 
इस महिला एस.एच.ओ. ने अपने कार्यकाल में बेहतर काम किया। उन्होंने सबसे ज्यादा लड़कियों को कोठों से मुक्त कराया। यह अभी तक रिकार्ड बना हुआ है। यही कारण है कि इस थाने को बैस्ट थाने का  सम्मान भी मिला था लेकिन डडवाल साब के जाने के बाद अधिकारियों ने महिला इंस्पैक्टरों को किनारे करना शुरू कर दिया। 
 
दिल्ली पुलिस में फिलहाल इस्टर्न, साऊथ इस्टर्न, साउथ वेस्टर्न, सैंट्रल, नादर्न और नई दिल्ली समेत आधा दर्जन रेंज काम कर रहे हैं। इनमें दिल्ली पुलिस के 11 जिले हैं, जिनमें 160 थाने आते हैं। इन थानों पर अगर नजर डालें तो इनमें 5 फीसदी महिलाओं को भी एस.एच.ओ. नहीं लगाया गया है। 
 
दिल्ली पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी द्वारा बुधवार रात जारी की गई एसएचओ की लिस्ट के हिसाब से दिल्ली के थानों में मात्र दो महिला एस.एच.ओ. नार्थ जिले के मौरिस नगर थाने में सुषमा रावत को हटाकर उनकी जगह आरती शर्मा को तैनात किया गया है। उधर साऊथ वेस्ट जिले के द्वारका सैक्टर-23 थाने का प्रभार नीरज टोकस को दिया गया है। 
 
इसके अलावा मैट्रो के अलग से 8 थाने हैं। यह थाने भी दिल्ली पुलिस के तहत ही आते हैं, इनमें से केवल एक थाने रिठाला में सीमा सिंह को एस.एच.ओ. तैनात किया गया है। 
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