नेत्रहीनों ने घेरा प्रधानमंत्री आवास

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Sunday, March 02, 2014-11:24 PM
नई दिल्ली( अशोक चौधरी): भारत में विकलांगता अधिकार विधेयक को लेकर दो गुटों का टकराव लगातार जारी है। हक के लिए लड़ रहे एक गुट की मांग है कि अध्यादेश से पास किया जाए तो दूसरा चाहता है कि सरकार विकलांगता की परिभाषा को और व्यापक बनाए। दोनों गुट अपनी मांग के साथ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कानून में बदलाव को लेकर आज भी नेत्रहीनों ने प्रधानमंत्री आवास घेरने का प्रयास किया।
 
 डिसेबल राइट ग्रुप के जावेद अबीदी का मानना है कि विकलांग होने का मतलब यह कि नहीं कि आप सबका अहसान लें। यह विकास का मुद्दा है और सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही, जो बहुत ही निराशाजनक है। सरकार को चाहिए कि इसे अध्यादेश के जरिए पास करे। विकलांगों को देश के बाकी नागरिकों की तरह देखा जाना चाहिए। आबीदी को स्पाइना बीफिडा नाम की बीमारी है। 15 साल की उम्र से वह व्हीलचेयर से बंधे हुए हैं। 
 
नेत्रहीनों के अधिकार के लिए लडऩे वाले रामसजीवन का कहना है कि सरकार विकलांगता की परिभाषा को बढ़ाए। वह केवल शारीरिक और मानसिक क्षतियों तक सीमित न रहे, जिनके पास इस दुनिया को देखने के लिए आंखे नहीं हैं, उनका भी ख्याल रखा जाए। वह कहते हैं कि यदि मौजूदा बिल अपनी हालत में पास होता है तो इससे नेत्रहीनों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।
 
2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग दो करोड़ 60 लाख विकलांग हैं। हालांकि गैरसरकारी संगठनों के मुताबिक इनकी संख्या ज्यादा है। विकलांग बिल इस समय संसद में फंसा है। विकलांग की परिभाषा को बढ़ाकर सिकेल सेल एनीमिया, थेलेसेमिया और मस्कुलर डिस्ट्रोफी जैसी बीमारियों सहित ऑटिज्म, अंधापन, सेरेब्रल पैलसी और तंत्रिका संबंधी बीमारियों को विकलांगता की परिभाषा में लाने की बात चल रही है। साथ में विधेयक के जरिए कोशिश की जा रही है कि सार्वजनिक क्षेत्र में विकलांगों के लिए तीन से पांच प्रतिशत पद आरक्षित किए जाएं और विश्वविद्यालयों में भी उनके लिए आरक्षण हो। 
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