राहुल गांधी की राजनीतिक पाठशाला में कांग्रेस भिड़ा रही है जुगाड़!

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Monday, March 03, 2014-3:45 PM

भोपाल: देश के पिछड़े इलाकों में बुंदेलखंड अव्वल है। इसकी मौजूदा समस्याएं इसे पिछड़ा बनाती हैं। इलाके के पिछड़ेपन का प्रचार कर राजनीतिक दल चुनावों में वोट हासिल करने का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहते, मगर इस बार कांग्रेस ने चुनाव से पूर्व ही इस इलाके में विकास योजनाओं की सौगातें देकर वोट बटोरने की मुहिम छेड़ दी है।

बुंदेलखंड कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की राजनीतिक पाठशाला रहा है। यही वजह है कि गांधी ने इलाके के दौरे कर उस भारत को समझने की कोशिश की थी, जो गांव में बसने के साथ समस्याओं से सामना करता है। यही वजह है कि गांधी ने इस इलाके के लिए साढ़े सात हजार करोड़ का विशेष पैकेज मंजूर कराया।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले बुंदेलखंड में कुल 13 जिले हैं। यहां लोकसभा की आठ सीटें हैं, इनमें से कांगे्रस के पास सिर्फ एक झांसी की सीट है। लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। लिहाजा कांग्रेस इस इलाके में अपनी जीत सुनिश्चित करने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहती है। यही कारण है कि बीते एक पखवाड़े में इस इलाके को वो सौगातें मिली हैं, जो बीते दशकों में नसीब नहीं हुई थी।

कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इस इलाके को दी गई सौगातों पर गौर करें तो पता चलता है कि झांसी को केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के अस्पताल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जैसी सुविधाएं देने के लिए उन्नयन और झलकारी बाई राष्ट्रीय संग्रहालय बनाने की सौगात मिली।

बुंदेलखंड से कांग्रेस के दो बड़े नेता प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य का नाता है। दोनों की कोशिश है कि किसी तरह कांग्रेस की स्थिति मजबूत की जाए। यही वजह है कि दोनों ने यहां के हालात बदलने के लिए कई प्रयास किए। इन प्रयासों में वे कई मर्तबा सफल भी रहे।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा फैसले लेने में देर जरूर हुई है लेकिन इस इलाके को आने वाले समय में इसका लाभ मिलेगा।

बुंदेलखड के पत्रकार रवींद्र व्यास का मानना है कि कांग्रेस योजनाएं बनाती है लेकिन सिर्फ चुनाव करीब आने पर। इसलिए लोगों के बीच यह धारणा बन गई है कि उसकी कोशिशें सिर्फ विकास का मुखौटा हैं। पिछले चुनाव से पहले बुंदेलखंड पैकेज आया और अब आधा दर्जन बड़े फैसले हुए।

लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे फैसले कहीं न कहीं कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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