नर्सरी दाखिला संबंधी उपराज्यपाल के निर्देशों से अदालत ने जताई सहमति

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Monday, March 03, 2014-10:28 PM

नई दिल्ली: केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि उपराज्यपाल द्वारा जारी नए नर्सरी दाखिला निर्देश सूचना के अधिकार अधिनियम के अनुरूप हैं क्योंकि उसमें पड़ोस में स्कूलिंग को प्राथमिकता दी गई है और गरीब बच्चों के लिए 25 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हालांकि 23 नवंबर 2010 को यह रूख अपनाया था कि गैर सरकारी सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त निजी स्कूल आरटीई के तहत दाखिले का अपना मापदंड तैयार करने को स्वतंत्र हैं।

न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष दायर एक नए हलफनामे में मंत्रालय ने कहा, ‘‘शिक्षा समवर्ती सूची का मामला है। इसलिए राज्य सरकार को वैसी नीतियां या दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार है जो जरूरी हों।’’ मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अवर सचिव ज्योति पहवा की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया, ‘‘शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों, स्पष्टीकरण के मद्देनजर दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा (1) आर्थिक रूप से कमजोर तबके लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित करने और (2) पड़ोस की सीमाओं के संबंध में अधिसूचना आरटीई अधिनियम के अनुरूप है।’’

केंद्र ने एक्शन कमेटी ऑफ अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स और फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर ऑल द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। ये दोनों संस्थाएं यहां ज्यादातर निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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