नियम कानून में फंसा निगम का रजस्व

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Tuesday, March 04, 2014-1:06 AM
नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): दिल्ली विकास प्राधिकरण (डी.डी.ए.) केंद्र सरकार की प्रॉपर्टी है या नहीं, यह तय होने पर ही निगम टैक्स वसूल सकेगी। डी.डी.ए. ने अपनी सभी प्रॉपर्टी को यूनियन (केंद्र सरकार की प्रॉपर्टी) बताते हुए निगम को प्रॉपर्टी टैक्स देने से मना कर दिया है। यही नहीं डी.डी.ए. ने निगम द्वारा वसूले जा रहे प्रॉपर्टी टैक्स पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। 
 
डी.डी.ए. ने निगम के खिलाफ  हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने सभी अटैच बैंक खाते और करोड़ों के प्रॉपर्टी टैक्स डिमांड को भी रद्द करा लिया है। अब निगम और डी.डी.ए. को तय करना है कि यह कैसे यूनियन प्रॉपर्टी है और कैसे यूनियन प्रॉपर्टी नहीं है। यदि यह तय हो जाता है कि डी.डी.ए. यूनियन प्रॉपर्टी है तो निगम को प्रॉपर्टी टैक्स में करोड़ों की चपत लग सकती है।
 
दरअसल, डी.डी.ए. ने निगम द्वारा वसूले जा रहे प्रॉपर्टी टैक्स और अटैच किए गए बैंक खातों को लेकर दिसम्बर, 2013 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सभी प्रॉपॢटयों को यूनियन बताया था। डी.डी.ए. का कहना था कि उनकी सभी प्रॉपर्टी यूनियन है, लिहाजा इन प्रॉपॢटयों से सॢवस चार्ज वसूला जाना चाहिए, जबकि निगम यूनियन प्रॉपर्टी को प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने का नोटिस भेज रही है। वहीं, दूसरी तरफ  निगम ने डी.डी.ए. के यूनियन प्रॉपर्टी होने को लेकर आपत्ति जताई थी। 
 
डी.डी.ए. की याचिका पर कोर्ट ने पिछले माह आदेश जारी कर निगम को डी.डी.ए. की प्रॉपर्टी का स्टेटस जांचने का आदेश दिया है साथ ही निगम की सभी डिमांड और अटैच किए गए बैंक खातों को डी-अटैच करने को कहा है। कोर्ट के आदेश के बाद डी.डी.ए., निगम को रिपोर्ट सौंप यह बताएगी कि डी.डी.ए. कैसे यूनियन प्रॉपर्टी है। 
 
पूर्व एकीकृत नगर निगम और वर्तमान में उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कर निर्धारक एवं समाहार्ता एम.एस.ए. खान का कहना है कि यूनियन यदि अपनी प्रॉपर्टी को किसी भी शर्त पर किसी को भी देती या बेचती है तो वह यूनियन प्रॉपर्टी नहीं रह जाती है। 
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