एम्स फुल, पटरी पर कैंसर पीड़ित

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Tuesday, March 04, 2014-1:16 AM
नई दिल्ली (रोहित राय): बिहार के रकसौल क्षेत्र में रहने वाले छोटा लाल और उनकी पत्नी सुनैना ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें और उनके इकलौते बेटे को जिंदगी एक दिन पटरी पर ला पटकेगी। जानलेवा बिमारी कैंसर से पीड़ित अपने 19 साल के बेटे का दर्द देखकर माता-पिता के आंसू वक्त-बेवक्त कभी भी छलकने लगते हैं।
 
अपने परिवार और तीन बहनों का एक मात्र सहारा राजेश पिछले 25 दिन से एशिया के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाहर बनी पटरी पर परिवार के साथ रह रहा है। माता-पिता एम्स प्रशासन से अपने बेटे के लिए एक बिस्तर देने की गुहार लगाते-लगाते थक गए लेकिन प्रशासन ने सभी बिस्तर फुल होने की दो टूक बात बोलकर दंपत्ति को चलता कर दिया।
 
बेटे की जानलेवा बिमारी के कारण परिवार ने एम्स के बाहर बनी पटरी पर ही एक झुग्गी डाल ली है और अब बेटे का इलाज करवा रहे हैं। एम्स में ओपीडी के चिकित्सकों ने पहले ही दिन राजेश का इलाज शुरू कर दिया। गर्दन, छाती और टांगों पर गांठें देखने के बाद चिकित्सकों ने राजेश को कुछ टेस्ट कराने को कहा जिनमें से एक टेस्ट की रिपोर्ट में कैंसर की पुष्टि हो गई।
 
छोटा लाल ने बताया कि इतनी गंभीर बिमारी की पुष्टि होने के बाद भी एम्स प्रशासन ने बिस्तर देने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद दंपत्ति पास में बनी एम्स की धर्मशाला में पनाह लेने के लिए गए तो वहां भी जगह नहीं मिली। बेटे को तिल-तिल मरता देख दंपत्ति ने एम्स के बाहर बनी पटरी पर ही झुग्गी डाल ली और रहने लगे। 
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