पारंपरिक चिकित्सा विकसित करिये, उपचार में आईटी का हो इस्तेमाल: प्रणब

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Wednesday, March 05, 2014-12:15 AM

नई दिल्ली : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि भारत को स्वास्थ्य लाभ की भूमि के रूप में जाना जाता है। उन्होंने आह्वान किया कि नए जमाने की बीमारियों के इलाज का पता लगाने के क्रम में पारंपरिक चिकित्सा तकनीकों में संभावना तलाश की जानी चाहिए। उन्होंने मोबाइल फोनों के जरिये उपचार मुहैया कराने के मकसद से सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की जरूरत पर भी बल दिया।

मुखर्जी ज्ञान एवं उद्योग भागीदारों द्वारा ‘‘हेल्थकेयर एलायंस’’ की सिफारिशों की राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति के बाद बोल रहे थे। राष्ट्रपति भवन से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया भर में प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाता हमारे पारंपरिक तरीकों के अविश्वसनीय वायदों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक अवसर है जिस पर और गौर किया जाना चाहिए और हम नए युग की स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज संभवत: खोज सकते हैं। एलायंस 10 संगठनों का एक समूह है जिसमें पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया पीएचएफआई, बेन एंड कंपनी, हेल्थ फेडरेशन आफ इंडिया, मैककिन्से, फिक्की, केपीएमजी, एआईएमए, पीडब्ल्यूसी और सीआईआई तथा अपोलो अस्पताल समूह शामिल हैं। यह भविष्य के लिए वैश्विक हेल्थकेयर की खातिर रोडमैप की खातिर काम कर रहा है तथा इसकी स्थापना अपोलो अस्पताल समूह के प्रमुख प्रताप सी रेड्डी ने की है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हेल्थकेयर क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को एकसाथ आना चाहिए ताकि हर किसी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रणाली के लिए सभी पक्षों के बीच वृहद सम्मिलन वक्त की मांग है। राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना, संवाद और प्रौद्योगिकी मेडिकल सूचना एवं स्वास्थ्यचर्या की पहुंच को मजबूत बनाने में अहम हैं। उन्होंने कहा कि हमारी हेल्थकेयर प्रणाली को इस क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए तैयार होना चाहिए। पोलियो के खिलाफ लड़ाई से साफ हुआ है कि सामूहिक प्रयास से चमत्कार हो सकते हैं।
 

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