बैंक में फर्जीवाड़ा करके बांट दिया करोड़ों का लोन

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Wednesday, March 05, 2014-3:08 PM
नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी/कुमार गजेन्द्र): दिल्ली  के एक सहकारी बैंक में करोड़ों रुपए के सनसनीखेज फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। बैंक के कुछ लोगों ने दलालों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपए के लोन बांट दिए। लोन जारी करने के लिए फर्जी तरीके से गारंटरों के दस्तावेज लोन दिलाने वालों के दस्तावेजों के साथ लगा दिए गए। अमर कालोनी पुलिस एफ.आई.आर. दर्ज कर जांच कर रही है लेकिन अभी तक पुलिस कुछ ठोस नहीं कर पाई है। 
 
दिल्ली  नागरिक सहकारी बैंक की एक ब्रांच लाजपत नगर के गढ़ी में है। बताया जाता है की डी.टी.सी. में काम करने वाले कई लोगों ने इस बैंक में लोन के लिए आवेदन किया था लेकिन उनका लोन नहीं हो पाया। पीड़ित रोहताश का आरोप है कि इसके बाद उसे एक दलाल तरुण उनसे मिला। इस दलाल ने उनसे कहा कि वह उन्हें लोन दिला देगा लेकिन यह लोन लाजपत नगर शाखा से दिलाया जाएगा। इसके बाद दलाल तरुण ने लोन का फार्म भरवा दिया। 
 
लोन दिलाने के लिए उसने  4 गारंटरों की मांग की गई थी, जिसके लिए रोहताश ने अपनी पत्नी माया देवी, सीता प्रजापति, जावेद खान और सतीश को गारंटर के रूप में पेश किया। इसके लिए सभी गारंटरों के दस्तावेज भी लगवाए गए थे। इसके अलावा दलाल ने उनसे ढेरों खाली पेपरों पर भी हस्ताक्षर करवा लिए थे।  झटका उन्हें तब लगा जब उन्हें बैंक की ओर से एक और बड़े लोन की किस्तें नहीं चुकाने का नोटिस मिला। जब उन्होंने बैंक  से इस बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि उन्होंने सीता प्रजापति नाम की एक महिला के लोन की गारंटी दी थी लेकिन इस माहिला ने लोन लेने के बाद किस्ते नहीं दीं। यह सुनकर रोहताश के होश उड़  गए। उन्होंने तुरंत बैंक के चेयरमैन जयभगवान से मुलाकात कर इस बात की शिकायत की तो, उन्होंने कहा कि लोन तो आपको ही चुकाना होगा। 
 
मामले का हल होता न देख रोहताश ने कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें इस मामले में पुलिस को एफ.आई.आर. दर्ज करने के आदेश देने और जांच करवाने की मांग की गई थी। इसी दौरान एक कई लोग और सामने आ गए, जिनके नाम से इसी फर्जी तरीके के इस्तेमाल करके लोन पास करा लिए गए थे। कोर्ट के आदेश पर अमर कालोनी थाने में एफ.आई.आर. नंबर 498 और 499 दर्ज कर ली गई। 
 
जांच होगी, फर्जी गारंटर रोकने के लिए उठाया कदम
"पुलिस इस बारे में जांच कर रही है, उनकी जांच रिपोर्ट क्या आती है, यह तो बाद की बात है, लेकिन हम भी इसमें जांच कर रहे हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही फर्जी गारंटरों की बात सामने आने पर अब हर गारंटर से अंडरटेकिंग लेने का नियम बनाया गया है, ताकि बाद में वह मुकर न पाए।"  -चेयरमैन जयभगवान
 
बैंक के बोर्ड में उठा मामला
"गरीब लोगों को बेवकूफ बनाकर फर्जीवाड़े का यह मामला बैंक के बोर्ड में उठ चुका है। बैंक के सीईओ ने एफआईआर मीटिंग में पढ़कर सुनाई थी। बैंक को इस सही जांच करानी चाहिए ताकि जालसाजों से पर्दा हट सकें।"  -एम.के.बंसल, वाइस चेयरमैन
 
लाजपत नगर शाखा में ही ज्यादा गड़बड़ी
"इस बैंक की पूरी दिल्ली में 16 शाखाएं है। बैंक में इस वक्त साढ़े तेइस करोड़ रुपये के लोन के डिफाल्टर है। बैंक की इतनी रकम फंसी हुई है, लेकिन ताजुब की बात यह है कि केवल इसी ब्रांच में दस करोड़ से अधिक के डिफाल्टर क्यों है।" -कृष्ण कुमार मित्तल, निदेशक
 
पीड़ितों का दर्द, कैसे चुकाएंगे दूसरों का कर्ज
 
दिल्ली परिवहन निगम(डीटीसी) में सहायक फीटर की नौकरी करने वाले सुभाष चंद ने अपने बेटे की शादी के लिए तीन लाख का लोन लिया था। उस लोन को देने के लिए दलाल ने तमाम कागजों पर हस्ताक्षर कराए थे। बेटे की शादी तो हो गई, लेकिन शादी के कुछ समय ही उन्हें पता लगा कि उसने चार लोगों के लोन की गारंटी दे रखी है। इन लोगों को वह जानता भी नहीं है। अब उसे डर है कि इनका लोन उसे भरना पड़ेगा। इतना ही नहीं उसे यह चिंता भी सताने लगी है कि अब उसकी जवान बेटी की शादी कैसे होगी। वह अपना कर्ज तो चुका देगा, लेकिन दूसरों का कैसे चुकाएगा। यह दर्द केवल सुभाष का ही नहीं दर्जनों पीड़ितों का यही हाल है। उनका आरोप है कि बैंक के अधिकारियों ने दलालों के साथ मिलकर उन्हें फर्जी गारंटर बना दिया। 
 
ढाका गांव में रहने वाले रोहताश सिंह डीटीसी में ड्राइवर है। दलाल तरुण ने उनके व पत्नी माया देवी के नाम पर लगभग 11 लाख का लोन करा दिया। इसकी एवज में उसने ढाई लाख रुपये भी ऐंठ लिया। इतना ही नहीं उसके हस्ताक्षर वाले कागजों को किसी सीता प्रजापति नाम की महिला के लोन में गारंटर बना दिया। उसे पांच लाख का लोन भी दे दिया गया, जबकि वह कभी सीता से मिला तक नहीं है। मुगेशपुर में रहने वाले डीटीसी के ड्राइवर शमशेर सिंह आठवीं फेल है। उसे इंगलिश क्या हिन्दी भी सही से नहीं आती। उसे सात लाख का लोन दिलाया और दलाल तरुण ने 90 हजार पहले ही वसूल लिए। उसके हस्ताक्षर वाले कागजों से सुभाष नाम के व्यक्ति के लोन का गारंटर बना दिया गया। देशबंधु कॉलेज के कर्मचारी जगदीश पांडे को तीन लाख का लोन मिला। लेकिन उसे भी चार लोगों के लोन का गारंटर बना दिया गया। इनमें से तीन को वह नहीं जानता था। 
Edited by:Karuna
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