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छत्तीसगढ़: बेमेतरा में चौंकाने वाले आकंड़े, 21, 681 बच्चे कुपोषित

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Thursday, March 06, 2014-11:16 AM

बेमेतरा: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में सबसे अधिक 21 हजार 681 बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से 322 बच्चे तो अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं। जिले में कुपोषित बच्चों के आंकड़ों को देखने से ही पता चलता है कि जिले के अफसर व कार्यकर्ता की योजनाओं के क्रियान्वयन व बच्चों को सुपोषित करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। एन आरएचएम के माध्यम से संचालित पुनर्वास केंद्र में भी तीन कुपोषित बच्चे वत्र्तमान में भर्ती हैं।

महिला बाल विकास विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2013 की स्थिति में जिले में 21 हजार 681 बच्चे कुपोषित हैं, जिसमें सबसे अधिक बेरला ब्लाक में हैं। बेरला ब्लॉक के ग्राम पतोरा में 20 बच्चे, रांका में 58, भिंभौरी में 13, खंडसरा परियोजना अंतर्गत खंडसरा में 12, चारभाठा में 17, बेमेतरा परियोजना में चोरभट्ठी में 16, बालसमुंद में 16, कुसमी में 26, नांदघाट परियोजना में टेमरी में 30 बच्चे, नांदघाट में 25, नवागढ़ परियोजना में हाथाडांडू में 36, बहरबोड़ में 17, साजा परियोजना में परसबोड़ में 20, अकलवारा में 16 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं।

महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत साहू ने बताया कि कुपोषित बच्चों को एंट्री के लिए शासन से एक साफ्टवेयर आया है। एंट्री करते समय बच्चों के नाम छूट गए होंगे। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में एक बच्चे के पीछे एक दिन में छह रुपये खर्च करने का प्रावधान है। नवाजतन योजना के तहत एक बच्चे के पीछे 10 रुपये प्रतिदिन व्यय कर सकते हैं। इस योजना में सुपोषण करने वाली संस्था, स्व सहायता समूह को राशि तभी दी जाती है, जब बच्चा सुपोषित हो जाता है। 14 गांवों में 859 में से 521 बच्चे सुपोषित हो चुके हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वजन त्योहार के तहत वजन की इंट्री कराई जाती है, जिसके अनुसार, बेमेतरा में कुपोषण का स्तर 6 जून 2012 को 41.55 प्रतिशत था जो 6 जून 2013 को 34.81 प्रतिशत आ गया था। वर्तमान में यह स्तर 26.42 प्रतिशत बताया जा रहा है। 6 जून 2012 को जिले में कुल 25599 बच्चे, 6 जून 2013 में 19790 बच्चे कुपोषित बताए गए हैं। 5809 कुपोषित बच्चों की स्थिति क्या है, वे आज किस श्रेणी में हैं। इस संबंध में विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है। वहीं नवंबर 2013 के सर्वे में 21681 बच्चे कुपोषित पाए गए।

उल्लेखनीय है कि गांवों से बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन व स्व सहायता समूहों को अतिकुपोषित, कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल के पुनर्वास केंद्र में भेजा जाना है। जहां शिशु रोग विशेषज्ञ की देखरेख में 14 दिनों तक रखकर बच्चे को सुपोषित की श्रेणी में लाना है। इसके लिए कुपोषित बच्चों की प्रतिदिन जांच कर चिकित्सकीय सुविधा व पोषणयुक्त समुचित आहार दिया जाता है। कुपोषित बच्चों को वजन के अनुसार रोजाना 5 से 6 बार भोजन दिया जाता है। कुपोषित बच्चे भर्ती होने पर उनकी मां को 15 रुपए के हिसाब से 2250 रुपए मानदेय भी दिया जाता है। योजना के क्रियान्वयन के लिए नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) द्वारा बेमेतरा के सरकारी सौ बिस्तर अस्पताल में 5 बिस्तर युक्त पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है।

पुनर्वास केंद्र बेमेतरा के प्रभारी डा. एमएम देवधर ने बताया कि एनआरएचएम के माध्यम से संचालित पुनर्वास केंद्र में बच्चों की देखभाल के लिए एक फीडिंग डिमांस्ट्रेटर की नियुक्ति की गई है। एक कुक के पद पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि केंद्र में अतिकुपोषित श्रेणी के बच्चे भर्ती किए जाते हैं। जिसमें बच्चे वजन, ऊंचाई व आनुपातिक चार्ट के अनुसार तीन स्टैंडर्ड से भी नीचे होते हैं। ऐसे बच्चे उचित पोषण के अभाव में कुपोषित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि यहां सिर्फ 3 बच्चे भर्ती हैं। अधिकतर पालक अपने बच्चे को यहां भर्ती करना नहीं चाहते। बहरहाल बेमेतरा जिले में बड़ी संख्या में बच्चों के कुपोषित होने के आंकड़ों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

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